तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर जिले में प्रशासनिक सक्रियता और जमीनी निगरानी का नया उदाहरण उस वक्त देखने को मिल रहा है, जब कलेक्टर संजय अग्रवाल नगर निगम आयुक्त अमित कुमार के साथ लगातार शहर और ग्रामीण अंचलों का दौरा कर रहे हैं। यह दौरे महज़ औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं को फाइलों से निकालकर फील्ड में परखने की सशक्त कोशिश हैं।मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण अभियान हो या शासकीय स्कूलों की व्यवस्थाएं, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति हो या अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत, कलेक्टर अग्रवाल प्रशासनिक टीमों के साथ अचानक निरीक्षण (छापेमारी) कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। धान खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधाएं, तौल प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर भी कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते नजर आ रहे हैं।नगर निगम आयुक्त अमित कुमार के साथ समन्वय बनाकर शहर की गली-मोहल्लों, स्वच्छता व्यवस्था, जलापूर्ति, सड़क, प्रकाश व्यवस्था जैसे मूलभूत विषयों पर भी गंभीरता से निरीक्षण किया जा रहा है। इसका सीधा संदेश साफ है। अब शिकायतें सिर्फ कागजों में नहीं रहेंगी, बल्कि मौके पर समाधान होगा।कलेक्टर संजय अग्रवाल की प्रशासनिक छवि एक ऐसे अधिकारी की रही है, जो लंबे समय तक बिलासपुर जिला मुख्यालय में लगभग छह वर्षों तक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। यह रिकॉर्ड अपने आप में उनकी क्षेत्रीय समझ, जमीनी अनुभव और प्रशासनिक पकड़ को दर्शाता है। शायद यही कारण है कि वे आज कलेक्टर के रूप में भी हर योजना को जमीन से जोड़कर देखने पर जोर दे रहे हैं।समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह कार्यशैली केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिकारियों-कर्मचारियों के भीतर जवाबदेही और संवेदनशीलता भी पैदा कर रही है। वहीं आमजन के बीच यह भरोसा मजबूत हो रहा है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को देखने-सुनने खुद आ रहा है, न कि सिर्फ रिपोर्टों पर निर्भर है।कुल मिलाकर, कलेक्टर संजय अग्रवाल और नगर निगम आयुक्त अमित कुमार की यह सक्रिय जोड़ी बिलासपुर में सुशासन, पारदर्शिता और जनहित की दिशा में ठोस संदेश दे रही है, कि सरकार की योजनाएं कागज़ों तक नहीं, हर गली, हर गांव और हर जरूरतमंद तक पहुंचेंगी।