तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
राजनांदगांव शहर में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर की जन-जन की आवाज और पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने कलेक्टर जितेन्द्र यादव को पत्र लिखकर राम दरबार मंदिर के आसपास सहित अन्य क्षेत्रों में हो रही कथित अवैध प्लाटिंग के मामलों को दबाने के “बड़े खेल” का आरोप लगाया है।पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने कहा कि एक ओर जिले के कलेक्टर द्वारा अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध लगातार सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारी और भवन विभाग के कर्मचारी इन निर्देशों को खुलेआम नजरअंदाज कर रहे हैं। 28 दिसंबर 2025 को राम दरबार मंदिर के बाजू विभिन्न खसरों की अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर कार्रवाई कर अखबारों में बड़ी-बड़ी तस्वीरें प्रकाशित करवाई गईं, लेकिन यह कार्रवाई केवल ढांचे तोड़ने तक ही सीमित रह गई।उन्होंने आरोप लगाया कि राम दरबार मंदिर के पीछे, लखोली वार्ड के कौरिन भाटा, शांति विजय रेजिडेंस सहित कई क्षेत्रों में नाला-नाली और सड़कें तो ध्वस्त कर दी गईं, परंतु अवैध प्लाटिंग करने वाले वास्तविक भूमि स्वामियों के नाम आज तक सार्वजनिक नहीं किए गए। न ही उनके विरुद्ध कोई नोटिस जारी हुआ और न ही एफआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।पूर्व पार्षद ओस्तवाल ने कहा कि नगर निगम के आयुक्त तथा भवन विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारी लेन-देन कर मामलों को दबाने में लगे हुए हैं। यह स्थिति न केवल शासन के नियमों के खिलाफ है, बल्कि जिले के कलेक्टर जैसे ईमानदार और तेजतर्रार आईएएस अधिकारी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने स्वयं अवैध प्लाटिंग करने वालों पर जांच कर एफआईआर दर्ज कराने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में यदि लेन-देन नहीं हो रहा है, तो फिर 10 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राम दरबार क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में अवैध प्लाटिंग करने वालों को नोटिस क्यों जारी नहीं किए गए?हेमंत ओस्तवाल ने कलेक्टर से इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लेने, निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने तथा अवैध प्लाटिंग के असली दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।