तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
जनसंपर्क विभाग में पदस्थ्य रहे उप संचालक ललित कुमार चतुर्वेदी मिलनसार एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। राज्य गठन के पूर्व से मेरा उनसे परिचय रहा है। उन्होंने 39 वर्षो से अधिक समय तक जनसंपर्क विभाग में अपनी सेवाये दी। जिसका जन्म से कोई शत्रु न हो उसे अजातशत्रु कहा जाता है। ‘‘न काहू से दोस्ती न काहू से बैर‘‘ ऐसे ही उनका स्वभाव रहा है। छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाओं के दौरान वे रायपुर के अलावा सरगुजा, कोरिया एवं जाजंगीर चांपा में भी कार्यरत रहें। कार्य के प्रति उनका समर्पण विभाग के नये-नये अधिकारियों के लिए अनुकणीय है। सन् 1984 में 2 एवं 3 दिसंबर की दरमियानी रात में घटित भोपाल गैस त्रासदी के दौरान वे वालिंिटंयर के रूप में सेवा की थी। इसके पश्चात् सन 1985 से जनसम्पर्क विभाग में लिपिक के पद पर अपनी सेवायें प्रारंभ कर उप संचालक पद से सेवानिवृत हुये। चतुर्वेदी ने अपनी सेवाओं के 15 साल 7 महीने मध्यप्रदेश में एवं 23 साल 7 माह छत्तीसगढ़ में बिताये। उनका तकिया कलाम शब्द ‘‘और गुरू कैसे हो‘‘। मै उन्हें अपना बड़ा भाई मानता हूँ। वे मुझे समय-समय पर अपना मार्गदर्शन देते रहे है। एक उनका प्रिय शगल रहा है। तवे में रोटी है तो उसका ध्यान रखो। इसका आशय ये है कि अपनी रोजी-रोटी के प्रति समर्पित रहो। चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पूर्व ही पारिवारिक कारणों से छत्तीसगढ़ आ गये थे। हांलाकि उनका गृह जिला इटावा हैं। उनके दोनों सुुपुत्र पढ़-लिखकर अपने-अपने काम-धाम में लग गये है। एक बालक भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) नई दिल्ली से पढ़ाई कर लखनऊ स्थित इलेक्ट्रानिक चैनल में कार्यरत है। राज्य गठन के पश्चात् 2002 में जनसम्पर्क संचालनालय द्वारा रचनात्मक लेखन पर कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें देश के चुनिंदा लेखकों एवं साहित्यकारों को आमंत्रित किया गया था। जिसमें नरेश सक्सेना भी शामिल थे। परिचर्चा के दौरान हमें स्लोगन बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लोग सरकारी योजनाओं पर अनेक प्रकार स्लोगन तैयार कर रहें थे। इस दौरान ललित चतुर्वेदी ने ‘‘जल है तो कल है‘‘ स्लोगन बनाया था जिसकी काफी सराहना की गई। 31 मई 2024 को वे जनसम्पर्क विभाग से उप संचालक पद पर सेवानिवृत हुए। हम उनके स्वस्थ्य दीर्घायु की कामना करते है। लेखक*छगन लोन्हारे**रायपुर*यह लेखक के निजी विचार