विकास नंद/सर्वव्यापी/
जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज जिला पंचायत सभागार में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद हेमंत नंदनवार ने की। बैठक में कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप, जिले के समस्त विकासखंड अधिकारी तथा सभी किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहे।बैठक में धान के स्थान पर दलहन–तिलहन, रागी, मक्का जैसी कम पानी वाली फसलों के रकबा विस्तार के निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति पर विशेष जोर दिया गया। जिले में रागी प्रोसेसिंग यूनिट को शीघ्र पूर्ण करने तथा तेल प्रसंस्करण इकाई की प्रगति की समीक्षा की गई। रबी मौसम में धान की खेती को हतोत्साहित करते हुए किसानों को तुलनात्मक रूप से अधिक लाभकारी वैकल्पिक फसलों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार–प्रसार कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए।ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर अन्य फसलों के जैविक उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया। स्वयं जैविक खेती करने वाले किसानों की सूची तैयार करने तथा उनके उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर चावल सहित अन्य उत्पादों के रूप में प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग कर राज्य के बाहर और विदेशों में विपणन के निर्देश एफपीओ को दिए गए, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।बैठक में सभी किसान उत्पादक संगठनों को “एक उत्पाद–एक नाम” के तहत स्थानीय बाजार और निर्यात के लिए विशिष्ट उत्पाद विकसित करने के निर्देश दिए गए। मिलेट फसलों, विशेषकर रागी से मिलेट दलिया, मिलेट मूसली, मिलेट स्टिक सहित विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार कर उनके विपणन की जानकारी भी दी गई।इसके साथ ही दलहन–तिलहन फसलों की बीज बोनी एवं उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर उपज उपलब्ध कर तिलहनी फसलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया गया। पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादों के विकास में महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता देने तथा पशु आहार निर्माण से जुड़े एफपीओ को किसानों को हरा चारा लगाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश भी दिए गए।