तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
यह सवाल किसी एक घर का नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के हजारों होमगार्ड जवानों की रोज़मर्रा की हकीकत बन चुका है। वर्दी पहनकर कानून-व्यवस्था, चुनाव, वीआईपी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियाँ निभाने वाला होमगार्ड जवान जब घर लौटता है, तो सबसे कठिन ड्यूटी उसे अपने परिवार के सामने निभानी पड़ती है। पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता भविष्य को लेकर सवाल करते हैं, लेकिन जवाब देने के लिए जवान के पास सिर्फ खामोशी होती है।छत्तीसगढ़ में सरकारें बदलीं, चेहरे बदले, नारे बदले, लेकिन होमगार्ड जवानों की किस्मत नहीं बदली। रमन सिंह सरकार के लंबे कार्यकाल में होमगार्ड जवानों से हर मोर्चे पर काम लिया गया, पर नियमितीकरण और स्थायी नौकरी जैसे बुनियादी सवालों को लगातार टाल दिया गया। वर्दी की इज्जत की बातें होती रहीं, लेकिन जवान के जीवन की सुरक्षा पर कभी ठोस फैसला नहीं लिया गया। यह साफ दिखा कि सत्ता के लिए जवान जरूरी था, लेकिन जवान के लिए सत्ता नहीं।इसके बाद भूपेश बघेल सरकार आई और होमगार्ड जवानों में एक नई उम्मीद जगी। आंदोलनों के दौरान संवाद हुआ, मंचों से संवेदना दिखाई गई, आश्वासन दिए गए कि न्याय होगा, लेकिन सत्ता के पाँच साल बीत जाने के बाद भी हकीकत वही रही—न नौकरी पक्की हुई, न भविष्य सुरक्षित। भावनात्मक भाषणों और राजनीतिक वादों के बीच जवान की ज़िंदगी फिर अधर में लटकती रही।अब वर्तमान में विष्णु देव साय सरकार सत्ता में है, लेकिन होमगार्ड जवान आज भी उसी सवाल के साथ खड़ा है। न कोई स्पष्ट नीति सामने आई है, न कोई समय-सीमा तय की गई है, और न ही यह बताया गया है कि सरकार आखिर कब तक जवानों को अस्थायी ही मानती रहेगी। सरकार की यह चुप्पी इस बात की गवाही देती है कि होमगार्ड जवान अब भी प्राथमिकताओं की सूची में सबसे नीचे हैं।सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि होमगार्ड जवान की ड्यूटी स्थायी है, जिम्मेदारी स्थायी है, जोखिम स्थायी है, लेकिन नौकरी आज भी अस्थायी है। जिस सिस्टम में जवान से पूरी निष्ठा और समर्पण की उम्मीद की जाती है, उसी सिस्टम में उसे सुरक्षित भविष्य देने से सरकारें कतराती रही हैं। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक संवेदनहीनता का खुला उदाहरण है।तीन-तीन सरकारों के गुजर जाने के बाद भी अगर होमगार्ड जवान वही सवाल पूछने को मजबूर है, तो यह सत्ता की सामूहिक नाकामी है। अब सवाल यह नहीं है कि पिछली सरकारों ने क्या किया, सवाल यह है कि वर्तमान सरकार क्या करेगी। अगर अब भी फैसला नहीं हुआ, तो इतिहास में एक और सरकार उस सूची में शामिल हो जाएगी, जिसने होमगार्ड जवानों से सिर्फ काम लिया, लेकिन उन्हें उनका हक देने से मुंह मोड़ लिया।और तब तक, छत्तीसगढ़ के हर होमगार्ड जवान के घर में हर सुबह, हर शाम वही सवाल गूंजता रहेगा,पत्नी रोज पूछती है, आपकी नौकरी पक्की कब होगी?