विकास नंद/ सर्वव्यापी
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा जिले में धान खरीदी कार्य को पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संपन्न कराने हेतु लगातार सघन निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर ने धान खरीदी केंद्र तेन्दूकोना (बागबाहरा) एवं कुरचुंडी (बसना) का औचक निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केंद्रों पर धान उठाव की स्थिति, दैनिक खरीदी लक्ष्य तथा लंबित पंजीकृत किसानों की जानकारी ली। इस अवसर पर अपर कलेक्टर रवि कुमार साहू, एसडीएम बागबाहरा नमिता मारकोले, समिति प्रबंधक, सहकारी समिति के कर्मचारी एवं कृषकगण उपस्थित थे।कलेक्टर ने समिति प्रबंधकों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि शत-प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित करते हुए शेष दिनों में बचे किसानों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि धान खरीदी का कार्य पूरी पारदर्शिता एवं सुचारू व्यवस्था के साथ सम्पन्न किया जाए। नोडल अधिकारियों को अपने-अपने केंद्रों में भौतिक सत्यापन कर किसानों को शेष रकबा समर्पण हेतु प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।कलेक्टर ने केंद्र प्रबंधन को सतत निगरानी बनाए रखने तथा अवैध धान विक्रय पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों का मौके पर ही त्वरित निराकरण करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि धान खरीदी से संबंधित ऑनलाइन प्रविष्टि उसी दिन पूर्ण की जाए तथा किसी भी स्थिति में लंबित न रखी जाए।खरीदी समाप्ति के साथ ही समापन रिपोर्ट, भौतिक सत्यापन एवं अभिलेख मिलान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर कमीशन, अवैध वसूली या अनधिकृत रोक-टोक की शिकायत मिलने पर संबंधित के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उपस्थित किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।उल्लेखनीय है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में धान खरीदी का कार्य सुचारू रूप से जारी है। 23 जनवरी की स्थिति में महासमुंद जिले के 182 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से कुल 8 लाख 53 हजार 913 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। अब तक 5 लाख 18 हजार 507 मीट्रिक टन धान का डी.ओ. जारी किया गया है, जिसके विरुद्ध 2 लाख 97 हजार 457 मीट्रिक टन धान का उठाव पूर्ण हो चुका है। जिले में अब तक 1 लाख 33 हजार 942 किसानों द्वारा धान विक्रय किया जा चुका है, जो कुल पंजीकृत किसानों का 84 प्रतिशत है।