तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में संचालित करोड़ों रुपये की योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत को शासन ने गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश जारी किए हैं। मंत्रालय स्थित महानदी भवन, नया रायपुर अटल नगर से 8 जनवरी 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विभाग के अंतर्गत संचालित कम्पा (CAMPA), ग्रीन इंडिया मिशन सहित अन्य योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और कथित गबन की शिकायत प्राप्त हुई है, जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच आवश्यक मानी गई है।यह आदेश छत्तीसगढ़िया एकता मंच एवं अन्य की ओर से प्रस्तुत शिकायत क्रमांक 510 दिनांक 29 दिसंबर 2025 के आधार पर जारी किया गया है। शिकायत की छायाप्रति आवश्यक कार्यवाही हेतु संबंधित अधिकारियों को प्रेषित करते हुए शासन ने निर्देश दिए हैं कि मामले की तथ्यात्मक, निष्पक्ष और गंभीरता से जांच की जाए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।शासन द्वारा इस पूरे प्रकरण की जांच का दायित्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ को सौंपा गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर कृत कार्यवाही करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाए और मामले की वर्तमान स्थिति से शासन को अवगत कराया जाए। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि जांच प्रतिवेदन तीन माह की समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से शासन को प्रस्तुत किया जाए।डिजिटल हस्ताक्षर से जारी इस आदेश पर उप सचिव डी.आर. सोंटापर के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शासन स्तर पर इस मामले को उच्च प्राथमिकता के साथ देखा जा रहा है। आदेश जारी होते ही वन विभाग के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और विभागीय अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि यदि जांच में शिकायतों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में सामने आ सकता है। करोड़ों रुपये की पर्यावरणीय एवं वन संरक्षण योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार सरकार की पारदर्शिता और सुशासन की छवि पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।कुल मिलाकर, यह आदेश संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ शासन अब वन एवं पर्यावरण से जुड़ी योजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है। अब सबकी निगाहें तीन माह के भीतर प्रस्तुत होने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि करोड़ों की इन योजनाओं में वास्तव में क्या खेल हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।