तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन क्रेडिट प्लांटेशन योजना और कैम्पा मद के अंतर्गत छत्तीसगढ़ वन विभाग के मरवाही वनमंडल में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर बिलासपुर संभाग आयुक्त एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), रायपुर से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।विभागीय सूत्रों के अनुसार बिलासपुर संभाग के मरवाही परिक्षेत्र अंतर्गत विभिन्न कक्षों में वृक्षारोपण और संरचनात्मक कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी गई थी। इनमें सछरा टोला (कक्ष 2042, 26 हेक्टेयर – 1.85 करोड़), चूहा बहरा (कक्ष 2065, 20 हेक्टेयर – 1.42 करोड़), उसाड़ (कक्ष 2100, 25 हेक्टेयर – 1.78 करोड़) तथा कैम्पा मद अंतर्गत ढपली पानी परिसर (कक्ष 2076, 50 हेक्टेयर – 2.12 करोड़ रुपये) शामिल हैं।हालांकि आरोप है कि कागजों में करोड़ों का खर्च दर्शाया गया, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग पाई गई।सूत्रों का दावा है कि इन कार्यों में परिक्षेत्र सहायक मरवाही के एक उप वन क्षेत्रपाल, एक वन रक्षक तथा डीएफओ कार्यालय मरवाही में पदस्थ शाखा प्रभारी सहायक ग्रेड-3 की प्रमुख भूमिका रही।जांच योग्य तथ्यों के अनुसार स्वीकृत रकबे की तुलना में कम क्षेत्र में ही वास्तविक रोपण किया गया, लेकिन चैन-लिंक पोल, पौधे, खाद, दवा, पाइप सहित संपूर्ण सामग्री की फर्जी रिसीविंग दर्शाकर फर्मों से कथित मिलीभगत के जरिए पूरा भुगतान करा लिया गया। ग्रीन क्रेडिट योजना में जहां स्टीम आधारित टॉल प्लांट रोपण अनिवार्य था, वहां मनरेगा योजना से विकसित चिच गोहना नर्सरी के सामान्य पौधों का उपयोग कर नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का आरोप है।सिंचाई कार्यों में भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। कागजों में पूर्ण सिंचित रोपण दिखाकर पाइप की पूरी राशि का भुगतान कराया गया, जबकि वास्तविकता में सामग्री आंशिक रूप से ही उपयोग हुई। शेष राशि कथित तौर पर फर्मों से कमीशन के रूप में अधिकारियों तक पहुंचने की बात कही जा रही है।सबसे गंभीर आरोप कैम्पा मद से 360 मुनारों के निर्माण को लेकर है। शिकायत के अनुसार मौके पर लगभग 100 मुनारे ही पाए गए, जबकि शेष राशि सामग्री आपूर्तिकर्ता से सांठगांठ कर हड़प लिए जाने का संदेह जताया गया है।आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी चौंकाने वाले संकेत सामने आए हैं। आरोप है कि एक कर्मचारी ने पेंड्रा की पंचम कॉलोनी में लगभग 2 करोड़ रुपये का आलीशान बंगला, गौरला (गोरखपुर) क्षेत्र में भूमि तथा करोड़ों का निर्माण कराया है। वहीं एक कर्मचारी द्वारा भी लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति, भारी मात्रा में स्वर्ण आभूषण, नकद राशि एवं रिश्तेदारों के नाम निवेश किए जाने की आशंका जताई जा रही है।अब सवाल यह उठ रहा है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चलाई जा रही केंद्र सरकार की योजनाओं में हुए इस कथित महाघोटाले पर जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंख मूंदे रहेंगे?शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।वहीं सर्वव्यापी इस पूरे मामले की विस्तृत खबर कर्मचारियों के नाम का खुलासा आगामी अंकों में करेंगी।