तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में इन दिनों शासन-प्रशासन की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर राज्यपाल रमेन डेका, जो एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं, लगातार संभाग स्तरीय बैठकों के माध्यम से सरकारी योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शासन के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी अपेक्षाकृत निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। यह स्थिति न केवल असामान्य है, बल्कि प्रशासनिक संतुलन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार वर्ष 2047 को लक्ष्य बनाकर दीर्घकालीन विकास योजनाओं पर काम करने का दावा कर रही है। विज़न डॉक्यूमेंट, रोडमैप और उच्चस्तरीय बैठकों की तस्वीरें सामने आ रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इससे मेल खाते नहीं दिखते। दो वर्षों के कार्यकाल के बाद भी आम जनता को न तो शहरों में और न ही ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस विकास का अनुभव हो रहा है।ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं, शहरों में अधूरे कार्य और धीमी रफ्तार विकास लोगों की नाराजगी का कारण बन रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी अंदरखाने स्वीकार कर रहे हैं कि जनता सरकार के कामकाज से असंतुष्ट है। पूर्ववर्ती रमन सिंह और भूपेश बघेल सरकारों के शुरुआती कार्यकाल की तुलना में वर्तमान सरकार का जमीनी प्रभाव कमजोर माना जा रहा है।ऐसे हालात में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शासन को वास्तविक स्थिति की जानकारी आखिर किस माध्यम से मिल रही है? प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि शीर्ष स्तर तक पहुंचने वाली अधिकांश रिपोर्टें चापलूसी से भरी हुई हैं, जिनमें समस्याओं की जगह उपलब्धियों का बढ़ा-चढ़ाकर बखान किया जा रहा है। जमीनी सच्चाई बताने का साहस बहुत कम अधिकारी कर पा रहे हैं।यही कारण है कि अब जनता की अपेक्षाएं सीधे राज्य के मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से जुड़ गई हैं। इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को केवल फाइलों और मीटिंग रूम तक सीमित रहने के बजाय जिलों, ब्लॉकों और विभागों में जाकर स्वयं स्थिति का आकलन करना चाहिए। जब तक शीर्ष प्रशासन खुद जमीन पर उतरकर निगरानी नहीं करेगा, तब तक योजनाओं और क्रियान्वयन के बीच की खाई पाटना संभव नहीं होगा।राज्यपाल की बढ़ती सक्रियता कहीं न कहीं इस बात का संकेत देती है कि शासन में निगरानी की कमी महसूस की जा रही है। यदि प्रशासनिक मुखिया समय रहते जमीनी हकीकत से रूबरू नहीं हुए, तो 2047 के सपने वर्तमान की नाराज जनता के बीच दम तोड़ सकते हैं।अब यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न बन चुका है। जनता साफ तौर पर चाहती है कि विकास के दावे कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दें और इसके लिए मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को निर्णायक भूमिका निभानी होगी।