विकास नंद/ सर्वव्यापी/
एक ओर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत प्रशासन द्वारा आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए रैली, अभियान और विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है। सरायपाली नगर की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती नजर आ रही हैं।
शहर में तेज रफ्तार वाहन, नियमों को ताक पर रखकर दौड़ते दोपहिया-चारपहिया, तथा भारी मालवाहक वाहनों का बेखौफ होकर नगर के भीतर से आवागमन अब आम बात हो चुकी है। अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है, लेकिन इन सब पर प्रशासन की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है।चौंकाने वाली बात यह है कि नगर के प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई नाममात्र की ही हो रही है। बाईपास की सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी भारी मालवाहक वाहन शहर के भीतर से गुजर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों, राहगीरों और स्कूली बच्चों की जान पर हर समय खतरा मंडराता रहता है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में सड़क सुरक्षा माह को सार्थक बनाना चाहता है, तो केवल जागरूकता अभियानों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए सख्त निगरानी, नियमित चेकिंग और नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अन्यथा सड़क सुरक्षा माह महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा और सड़कों पर लापरवाही का यह खतरनाक सिलसिला यूँ ही जारी रहेगा।