वनमंडल घोटाले में ईओडब्ल्यू को सौंपा गया ज्ञापन, जांच की उठी तेज मांग।

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तरुण कौशिक /संपादक ,सर्वव्यापी/

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन क्रेडिट प्लांटेशन योजना और कैम्पा मद के तहत बिलासपुर संभाग अंतर्गत मरवाही वनमंडल में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले को लेकर अब मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा रायपुर तक पहुंच गया है। पूरे प्रकरण में अनियमितताओं, फर्जी भुगतान और आय से अधिक संपत्ति अर्जन के आरोपों को लेकर ईओडब्ल्यू को विधिवत ज्ञापन सौंपा गया है।ज्ञापन में मरवाही परिक्षेत्र अंतर्गत सचरा टोला, चूहा बहरा, उसाड़ और ढपली पानी परिसरों में हुए प्लांटेशन कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि स्वीकृत रकबे से कम क्षेत्र में रोपण कर, सामग्री की पूरी मात्रा का फर्जी रिसीविंग दिखाकर फर्मों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये की राशि का गबन किया गया।ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख आरोप-ग्रीन क्रेडिट योजना में टाल प्लांट पौधों की खरीद के बजाय मनरेगा नर्सरी से पौधे लाकर रोपण।सिंचित प्लांटेशन दिखाकर पाइप व अन्य सामग्री की फर्जी खरीद और अंतर की राशि की बंदरबांट।कैम्पा मद से फर्जी और नियमविरुद्ध भुगतान।कैम्पा मद से स्वीकृत मुनारा निर्माण में बड़े पैमाने पर घोटाला- 360 स्वीकृत मुनारों में केवल लगभग 100 का निर्माण।आय से अधिक संपत्ति का भी आरोपज्ञापन में लगाएं गये है। संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति, आलीशान मकान, जमीन क्रय, सोना-चांदी और नगद राशि अर्जित किए जाने का भी उल्लेख है, जिसे अवैध कमाई से जोड़ा गया है। जिसमें कुछ वन विभाग के वन पाल, बीट गार्ड, लिपिक, उप वन पाल, रेंजरों का नाम का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि ईओडब्ल्यू द्वारा दस्तावेजों, भुगतान फाइलों, फर्मों की भूमिका और जमीनी सत्यापन की निष्पक्ष जांच की जाए, तो ग्रीन क्रेडिट और कैम्पा मद में वर्षों से चल रही बंदरबांट की पूरी परतें खुल सकती हैं। अब निगाहें ईओडब्ल्यू रायपुर पर टिकी हैं, क्या जांच शुरू होगी या फिर ग्रीन क्रेडिट योजना भी फाइलों में दबी रह जाएगी?


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