गौरेला-पेंड्रा-मरवाही /सीता बनाफर/ सर्वव्यापी

जीपीएम जिले के गठन को फ़रवरी में छ: साल पूरे होने वाले हैं लेकिन जिले के बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने वाले रेशम विभाग का कार्यालय अभी भी बिलासपुर से संचालित हो रहा है l जिसके कारण जिले के पांचो शासकीय रेशम केंद्रों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और केन्द्र भगवान भरोसे चल रहे हैं l राज्य से प्राप्त होने वाले करोड़ों के आबंटन बजट राशि का बिलासपुर जिले में बैठे रेशम विभाग के आला-अफसर बंदरबाँट करते हैं l जीपीएम जिले में कर्मचारियों का सेटअप नहीं होने का हवाला देकर अधिकारी जिले को मिलने वाली राशि का सदुपयोग नहीं करते और इसका परिणाम जीपीएम जिले वासियों को भुगतना पड़ता है l

छ: सालों में एक ही प्रशिक्षण- संयुक्त संचालक रेशम अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण कार्यालय, कोसा कारखाना परिसर, कोनी बिलासपुर द्वारा जीपीएम जिले में 6 सालों में केवल एक बार ही नावागांव की समूह के महिलाओं का बारी उमराँव में 10 दिवसीय धागा करण प्रशिक्षण कराया गया है l जिसमें सिर्फ 20 हितग्राही महिलाएँ ही लाभान्वित हुए हैं l जिसमें हितग्राहियों को छात्रवृत्ति की राशि सीधे उनके खाते में भेजी गई है l यह प्रशिक्षण दिनांक 16 जनवरी 2024 से 25 जनवरी 2024 तक रखा गया था l अस्सी हजार भोजन और कोकून खरीदने में खर्च – प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यालय सहायक संचालक रेशम बिलासपुर से प्रशिक्षण के लिए छियासी हजार रुपए प्राप्त हुए थे, जिसमें चाय-नाश्ता एवं भोजन पर पचास हजार रुपये खर्च किए गए जिसका बगैर जीएसटी वाला बिल अभिषेक शुद्ध शाकाहारी भोजनालय, जैन लाज के सामने पेंड्रा का लगाया गया है l वहीं बिना जीएसटी का दूसरा बिल छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग रायपुर का कोकून खरीदने का लगाया गया है जिसमें तीस हजार खर्च किये गए हैं l नवागांव रेशम कृमि पालन महिला समूह के सील में जीपीएम जिले के गठन के चार साल बाद भी बिल में जिला बिलासपुर ही अंकित है जो अधिकारीयों के निर्देश पर बड़े खेल की ओर इशारा करता है l सनद रहे की अभी तक सहायक संचालक रेशम बिलासपुर के क्षेत्राधिकार में ही जीपीएम जिले के पांचो शासकीय रेशम केंद्र आते हैं, जिनकी स्थिति दिनों-दिन बद से बदतर होती जा रही है l बिलासपुर कार्यालय में बैठे वरिष्ठ रेशम अधिकारी संजय तिवारी दो-तीन महीने में एक बार ही जीपीएम जिले का निरीक्षण करते हैं l सभी रेशम केंद्र महिला समूह के नाम पर पुरुषों द्वारा ही मनमाने ढंग से चलाए जा रहे हैं l पथर्री रेशम केंद्र तो तीन सालों से बंद पड़ा है लेकिन कागजों पर ज़िंदा है l केन्द्र आवारा पशुओं का अड्डा बन गया है l सहायक संचालक रेशम भजन लाल उईके साल-साल भर तक जीपीएम जिले का दौरा नहीं करते हैं l बहरहाल देखना यह होगा की सर्वव्यापी अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद रेशम विभाग को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा आगे क्या सकारात्मक पहल की जाती है या फिर रेशम विभाग के आला-अधिकारी अपनी ही मनमानी करते रहेंगें l