छत्तीसगढ़ वन विभाग में करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप, राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल तक से उच्चस्तरीय जांच की मांग।

Share Now

तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस मामले को लेकर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव सहित छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका,, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील एवं अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, बिलासपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पाण्डेय को विस्तृत शिकायत भेजते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत विभिन्न जिलों में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी केंद्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में कागजों पर कार्य पूर्ण दर्शाकर, जमीनी स्तर पर बिना काम किए ही शासकीय राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं। कई योजनाओं में फर्जी मस्टर रोल, अपूर्ण कार्यों को पूर्ण दिखाना और बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक इन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन के साथ 16 पृष्ठों की दस्तावेज़ी शिकायतें भी संलग्न की गई हैं, जो विशेष रूप से बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल से संबंधित बताई गई हैं। दस्तावेज़ों में विभिन्न योजनाओं के नाम, स्वीकृत राशि, कार्य की स्थिति और कथित अनियमितताओं का विस्तृत विवरण शामिल होने का दावा किया गया है।हालांकि, शिकायत कर्ता का कहना है कि यह अनियमितताएं केवल एक वन मंडल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में वन विभाग के भीतर व्यापक स्तर पर फैली हुई हैं और यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।मामले को और भी गंभीर बनाता है यह आरोप कि विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें करने वाले एक कथित व्यक्ति को प्रत्येक माह एक वन मंडल से लगभग रुपए 5 लाख रुपये तक का कमीशन दिए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। इससे यह संदेह गहराता है कि शिकायतों को दबाने और अधिकारियों को संरक्षण देने का एक संगठित नेटवर्क विभाग के भीतर सक्रिय हो सकता है।शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो। अब देखना यह होगा कि इतने उच्च स्तर तक पहुंची शिकायत पर शासन-प्रशासन क्या कदम उठाता है, या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!