तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी
भाजपा सरकार भले ही मंचों से भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट तस्वीर पेश कर रही है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि भाजपा के ही वरिष्ठ नेता, पूर्व गृह एवं सहकारिता मंत्री और आदिवासी समाज के कद्दावर चेहरा ननकी राम कंवर को अपनी ही सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर खुलकर बोलना पड़ रहा है।राज्य के पीडब्ल्यूडी, खनिज विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग सहित कई अहम विभागों में भ्रष्टाचार खुलेआम फल-फूल रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार बनने के बाद सत्ता की ढाल इतनी मजबूत हो गई है कि अब पूछ-परख की व्यवस्था ही ठप पड़ गई है। अफसरशाही और ठेकेदार गठजोड़ बेखौफ होकर सरकारी संसाधनों की बंदरबांट में जुटा है।बताया जा रहा है कि ननकी राम कंवर लंबे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला और भी गंभीर है, क्योंकि वे अपनी ही पार्टी और सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। यह संकेत है कि अंदरखाने हालात कितने बेकाबू हो चुके हैं।राजनीतिज्ञों का मानना है कि जब सरकार के ही वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने लगें, तो यह सुशासन के दावों पर सीधा तमाचा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भाजपा सरकार में ईमानदार आवाज़ों को जानबूझकर अनसुना किया जा रहा है, या फिर भ्रष्टाचारियों को राजनीतिक संरक्षण देकर सिस्टम को कमजोर किया जा रहा है?अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार अपने ही वरिष्ठ नेताओं की चेतावनी को गंभीरता से लेगी, या फिर ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ एक चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा?