छत्तीसगढ़ी उपेक्षा की पराकाष्ठा!जनमन पत्रिका में न छत्तीसगढ़ी, न जनभावना — अंग्रेज़ी थोपने पर भड़का छत्तीसगढ़।

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तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ सरकार की उपलब्धियों का गुणगान करने वाली मासिक पत्रिका “जनमन” एक बार फिर विवादों में घिर गई है। हैरानी की बात यह है कि वर्षों से प्रकाशित यह पत्रिका आज तक छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित नहीं की गई, जबकि अब इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा अंग्रेज़ी में प्रकाशित किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ की अस्मिता, भाषा और आम जनता की उपेक्षा का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा प्रकाशित जनमन पत्रिका के अक्टूबर 2025 विशेष अंक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश भी अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित किया गया है। यह वही मुख्यमंत्री हैं जिनकी पहचान एक सरल, ग्रामीण और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़े जननेता के रूप में की जाती रही है। ऐसे में अंग्रेज़ी में संदेश प्रकाशित होना न केवल विरोधाभासी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि जिस भाषा को स्वयं मुख्यमंत्री बोलते तक नहीं, उसी भाषा में जनता को संबोधित क्यों किया जा रहा है?राज्य की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण और छत्तीसगढ़ी भाषी है। ऐसे में सरकारी धन से प्रकाशित पत्रिका में छत्तीसगढ़ी भाषा को पूरी तरह नजरअंदाज करना जनभावनाओं पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।छत्तीसगढ़ियों का कहना है कि यदि पत्रिका का उद्देश्य वास्तव में जनता तक सरकार की योजनाएँ पहुँचाना है, तो छत्तीसगढ़ी और हिंदी को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?इस निर्णय को लेकर बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि“क्या छत्तीसगढ़ सरकार को अपनी ही भाषा पर भरोसा नहीं रहा?”आरोप यह भी लग रहे हैं कि जनमन पत्रिका अब जनता की नहीं, केवल सत्ता के प्रचार का माध्यम बनकर रह गई है, जहाँ ज़मीनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की बजाय अंग्रेज़ी अभिजात्य वर्ग को खुश करने की कोशिश की जा रही है।भाषाविदों का कहना है कि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा देने की बातें केवल भाषणों तक सीमित हैं, जबकि व्यवहार में सरकार खुद अपनी भाषा से मुंह मोड़ रही है।यह स्थिति आने वाले समय में भाषाई आंदोलन का रूप भी ले सकती है।अब बड़ा सवाल यह है किक्या छत्तीसगढ़ सरकार इस जनआक्रोश को गंभीरता से लेगी?क्या जनमन पत्रिका को छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित करने का साहस दिखाएगी?या फिर छत्तीसगढ़ की भाषा और पहचान यूँ ही हाशिए पर धकेली जाती रहेगी? छत्तीसगढ़ की जनता जवाब चाहती है और वह भी अपनी भाषा में।


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