तरुण कौशिक/संपादक, सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार को लेकर ग्रामीण अंचलों में भरोसे की जमीन खिसकती नजर आ रही है। जिन गांवों ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को निर्णायक बढ़त दिलाई थी, वहीं आज सरकार की नीतियों और वादों को लेकर गहरी नाराज़गी उभरकर सामने आ रही है। महंगाई, बेरोजगारी, अधूरी योजनाएं और जमीनी समस्याओं की अनदेखी ने ग्रामीण जनता के सब्र की सीमा तोड़ दी है।सरकार की बहुचर्चित महतारी वंदन योजना, जिसे ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत हथियार बताया गया था, अब चुनावी चमत्कार करती नहीं दिख रही। कई गांवों में योजना का लाभ समय पर नहीं मिलने, नाम कटने, तकनीकी खामियों और बढ़ती आवश्यकताओं के मुकाबले बेहद सीमित राशि ने महिलाओं में भी असंतोष पैदा कर दिया है।ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि “महतारी वंदन” सम्मान जरूर है, लेकिन पेट, इलाज और पढ़ाई की महंगाई के आगे यह सहायता ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। दूसरी ओर किसानों को खाद-बीज की किल्लत, समर्थन मूल्य पर खरीदी की अनिश्चितता और बढ़ती लागत ने सरकार के प्रति नाराज़गी और बढ़ा दी है।गांवों में बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षकों की कमी, जर्जर सड़कें और अधूरे आवास योजनाएं सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीण मतदाताओं का साफ कहना है कि सिर्फ योजनाओं के पोस्टर और प्रचार से भरोसा नहीं लौटेगा।राजनीतिक जानकारों की मानें तो यदि सरकार ने जल्द ही ग्रामीण मुद्दों पर ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आगामी विधानसभा चुनाव में महतारी वंदन योजना अकेले भाजपा की नैया पार लगाने में नाकाम साबित हो सकती है।अब सवाल यह है कि क्या विष्णु सरकार गांवों की नाराज़गी को समय रहते समझ पाएगी, या फिर ग्रामीण असंतोष ही सत्ता की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाएगा?