तहसीलदार के साथ खड़ा छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ: किसी के दबाव में तहसीलदार को हटाने पर करेंगे आंदोलन।

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तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी

मुंगेली जिले के तहसील लोरमी में पिछले 13 दिनों से चल रहा गतिरोध अब एक नया मोड़ ले चुका है। कार्य के प्रति सख्ती बरतने वाले तहसीलदार शेखर पटेल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों के दांव अब उन पर ही उल्टे पड़ते नजर आ रहे हैं। अनुशासन और काम की अधिकता को ‘प्रताड़ना’ बताने वाले कर्मचारियों द्वारा तहसीलदार के चरित्र हनन की कोशिश का मामला अब जिला कलेक्टर की चौखट तक पहुँच गया है।लोरमी तहसील में पदस्थ राजस्व निरीक्षक और पटवारी तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की मांग पर अड़े हैं। उनका आरोप है कि तहसीलदार रात 2 बजे तक ग्रुप में काम का निर्देश देते हैं, अत्यधिक कारण बताओ नोटिस जारी करते हैं और छुट्टियां नहीं देते। हालांकि, प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यह विरोध केवल जवाबदेही से बचने और काम की चोरी करने का एक माध्यम है।हड़ताल के बीच ‘ट्रू सोल्जर’ नामक समाचार पत्र में एक बेहद आपत्तिजनक लेख प्रकाशित किया गया, जिसमें तहसीलदार पर महिला पटवारियों को देर रात वीडियो कॉल करने और अश्लील बातें करने के गंभीर आरोप लगाए गए। इसी लेख के आधार पर तथाकथित समाजसेवी कोमल सिंह राजपूत ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई थी।अपनी छवि पर कीचड़ उछालने की कोशिश देख तहसीलदार शेखर पटेल ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने माननीय हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल शुक्ला के माध्यम से कोमल सिंह राजपूत को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस मिलते ही झूठे आरोपों की हवा निकल गई और कोमल सिंह राजपूत ने तत्काल कलेक्टर जनदर्शन में दोबारा पहुंचकर अपने कृत्य के लिए लिखित माफीनामा प्रस्तुत किया। इससे स्पष्ट हो गया कि तहसीलदार के विरुद्ध लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह निराधार और उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से रचे गए थे।अब इस लड़ाई में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का संगठन ‘छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ’ भी कूद पड़ा है। संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मठ अधिकारी को हड़ताल और झूठे आरोपों के दबाव में नहीं हटाया जाना चाहिए। संघ का कहना है कि यदि अनुशासन बनाए रखने वाले अधिकारियों को इस तरह निशाना बनाया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी अधिकारी ईमानदारी से कार्य नहीं कर पाएगा।हड़ताल के चलते आम जनता के आय, जाति, निवास और जमीन संबंधी काम पूरी तरह ठप हैं। लोरमी के बाद अब यह हड़ताल जिला स्तर पर भी शुरू हो गई है। सवाल यह उठता है कि जब आरोप झूठे साबित हो चुके हैं और माफीनामा तक आ चुका है, तो क्या शासन-प्रशासन इन हड़ताली कर्मचारियों के अनुचित दबाव के आगे झुकेगा या कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का साथ देकर प्रशासनिक व्यवस्था बहाल करेगा?


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