तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर एक बार फिर सियासी और शैक्षणिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आगामी फरवरी माह में होने जा रहे विधानसभा सत्र में स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े एक अहम प्रश्न के जरिए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा गया है।विधानसभा सचिवालय में क्रमांक 534 के तहत प्रस्तुत इस अतारांकित प्रश्न में यह जानना चाहा गया है कि प्रदेश में शासन द्वारा नियुक्त एवं वर्तमान में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की कुल संख्या कितनी है, जिनके लिए नियम एवं शर्तों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। साथ ही इन शिक्षकों की जिला-वार जानकारी भी मांगी गई है।प्रश्न में यह भी पूछा गया है कि TET को अनिवार्य किए जाने से संबंधित नियमों और शर्तों को लेकर क्या शासन द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष कोई पक्ष प्रस्तुत किया गया है या नहीं। यदि अब तक ऐसा नहीं किया गया है, तो शासन इस विषय पर क्या विचार या कार्यवाही प्रस्तावित कर रहा है।सबसे अहम सवाल वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को लेकर उठाया गया है। प्रश्न में सरकार से स्पष्ट नीति या निर्देश की जानकारी मांगी गई है कि क्या इन शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया है। यदि हां, तो इसके लिए शासन द्वारा कब और क्या निर्णय लिया गया।इसके अतिरिक्त यह भी जानना चाहा गया है कि क्या छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अन्य विभागों में नियुक्त पदों पर भी किसी प्रकार की पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया है। यदि हां, तो किन-किन विभागों में और यदि नहीं, तो इसके पीछे कारण क्या हैं।विधानसभा सत्र में इस प्रश्न के उठने से यह तय माना जा रहा है कि शिक्षक नियुक्तियों, TET की अनिवार्यता और इससे जुड़े नियमों पर सरकार को सदन में स्थिति साफ करनी होगी। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पूर्व नियुक्तियों को लेकर यह प्रश्न आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है।