तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी

एक युग का अंत हो गया। सुरों के जादूगर ने खामोशी ओढ़ ली।संगीत जगत के निर्विवाद बादशाह, मखमली आवाज़ के धनी, छत्तीसगढ़ी लोक-संस्कृति के सशक्त स्तंभ पूजनीय राधेश्याम कौशिक (पुत्र स्व. मनोहर लाल कौशिक) का आज दिनांक 12 फरवरी 2026, गुरुवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनका जाना सिर्फ कुर्मी समाज ही नहीं, बल्कि समूचे सर्व समाज और संगीत जगत के लिए अपूरणीय एवं अविश्वसनीय क्षति है। आज का दिन संगीत के इतिहास में एक काले दिवस के रूप में दर्ज हो गया। कौशिक की मखमली, सुरीली और आत्मा को छू लेने वाली आवाज़ में छत्तीसगढ़ी नाट्य कला मंच, छत्तीसगढ़ी गीत, फिल्मी गीत, शास्त्रीय संगीत, राधा-विहार भजन, भक्ति गीत, होली-फाग सहित हर रंग, हर रस और हर भाव समाया हुआ था। उनके सुर थमे जरूर हैं, लेकिन उनके नग़मे अमर रहेंगे और सदैव दिलों में गूंजते रहेंगे।संगीत के इस महान जादूगर ने सिर्फ गाया ही नहीं, बल्कि लोगों को प्यार, सौहार्द और शांति का पाठ भी पढ़ाया। उनकी वाणी में अद्भुत मिठास थी—“ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय…”उनकी बात सुनने मात्र से लोगों को मानसिक शांति और सुकून का अनुभव होता था। वे मिलनसारिता, मधुर व्यवहार और सरलता के जीवंत प्रतीक थे।किसान पुत्र रहे राधेश्याम कौशिक एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। नगोंई ग्राम के सरपंच के रूप में उन्होंने ग्राम विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जनसेवक, जनप्रिय, न्यायप्रिय और स्पष्ट वक्ता के रूप में उनकी अलग पहचान थी। सादगी, सहज-सरल स्वभाव और मधुर व्यवहार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।व्यक्तिगत जीवन में वे पिता तुल्य मामा, मार्गदर्शक और सुख-दुख के साथी रहे। उनका जाना अपनों के लिए गहरा व्यक्तिगत आघात है।अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें धर्मपत्नी निर्मला देवी, दो सुपुत्र—शिवेंद्र कौशिक (जिला पंचायत सदस्य) एवं सत्येंद्र कौशिक, सुपुत्रियाँ श्रीमती जयंती एवं ज्योति कौशिक शामिल हैं।इसके अतिरिक्त छोटे भाई स्व. घनश्याम कौशिक का परिवार—भाभी मीना, भतीजे चंद्रेश एवं सूर्येश, तीन बहनें राधा, त्रिवेणी एवं गंगोत्री, तथा स्व. चाचा हरलाल कौशिक का विस्तृत परिवार शोकाकुल है। राधेश्याम कौशिक, जिला पंचायत सदस्य शिवेंद्र प्रताप कौशिक के पिता एवं सर्वव्यापी अख़बार के संपादक व ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ के प्रदेश महासचिव तरुण कौशिक के मौसेरे बड़े भाई थे।उनके निधन से पूरे क्षेत्र, समाज और संगीत प्रेमियों में गहरा शोक व्याप्त है।ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति, सद्गति और मोक्ष प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति और संबल दें। आप गए नहीं हैं…आप सुर बनकर, स्मृति बनकर,हमारे दिलों में सदैव गूंजते रहेंगे।