तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
अब वह दिन दूर नहीं जब बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, चिप्स और इंस्टेंट नूडल्स जैसे पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर भी शराब और सिगरेट की तरह डरावनी स्वास्थ्य चेतावनियाँ लिखी दिखाई दें। देश में तेजी से बढ़ते लाइफस्टाइल रोगों और गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) को देखते हुए इस दिशा में गंभीर पहल की मांग उठने लगी है। जागरूक नागरिक प्रवेश कुमार जोशी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजते हुए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर अनिवार्य हेल्थ वार्निंग लेबल और A-to-E ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने की अपील की है।प्रस्ताव में चेताया गया है कि आज का पैकेट बंद भोजन धीरे-धीरे “साइलेंट किलर” बनता जा रहा है। अत्यधिक चीनी, रिफाइंड मैदा, पामोलिन तेल और रासायनिक एडिटिव्स से बने खाद्य पदार्थ मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और यहां तक कि कैंसर जैसी घातक बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। पत्र में ICMR के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में 100 मिलियन से अधिक लोग पहले से ही मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि करोड़ों लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं।प्रवेश जोशी ने अपने पत्र में कहा है कि जिस प्रकार शराब और तंबाकू पर स्वास्थ्य चेतावनी देना अनिवार्य है, उसी प्रकार अत्यधिक चीनी और फैट युक्त खाद्य पदार्थों पर भी स्पष्ट, बड़े और डराने वाले शब्दों में चेतावनी होनी चाहिए। प्रस्ताव में मांग की गई है कि पैकेट के सामने मोटे अक्षरों में लिखा जाए—“अत्यधिक सेवन से मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर का खतरा।”इसके साथ ही उपभोक्ताओं को आसान और स्पष्ट जानकारी देने के लिए A-to-E ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है। इस प्रणाली के तहत खाद्य पदार्थों को रंगीन कोडिंग दी जाएगी—‘A’ (हरा) सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन को दर्शाएगा, जबकि ‘E’ (लाल) अत्यधिक हानिकारक खाद्य पदार्थों का संकेत देगा। इससे आम उपभोक्ता बिना तकनीकी जानकारी के भी यह समझ सकेगा कि वह जो खरीद रहा है, वह उसके शरीर के लिए कितना खतरनाक है।