संपादक के कलम से…राधेश्याम कौशिक के बाद नगोई : अब कोन थामही गांव के एकता के डोर?

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तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी/

बिलासपुर जिला के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के नगोई गांव आज गहरा शोक अऊ सन्नाटा म डूबे हवय। ये सन्नाटा सिरिफ एक लोक कलाकार के चले जेन के नइये, बल्कि वो आत्मा के खामोशी आय, जऊन बरसों ले पूरा गांव ला एकता के सूत्र म बांधे रखे रहिस। लोक कलाकार राधेश्याम कौशिक के निधन ले नगोई गांव अपन एक मजबूत आधार, अपन मार्गदर्शक अऊ अपन सांस्कृतिक पहचान ला खो दिस। वो कलाकार भर नइ रहिन, वो गांव के मन, बोली अऊ संस्कार रहिन। जिहां झगड़ा रहिस, उहां वो समाधान बनिन, जिहां दुख रहिस, उहां सहारा बनिन अऊ जिहां खुशी रहिस, उहां अपन गीत अऊ मुस्कान ले सबो ला जोड़ दिन।राधेश्याम कौशिक , लक्ष्मी मनोहर लाल कौशिक के बेटा रहिन, फेर नगोई के हर घर के अपन आदमी रहिन। ओखर आवाज म लोक संस्कृति के मिठास रहिस अऊ ओखर व्यवहार म अपनपन। आज जब वो नइ हवंय, त गांव सिरिफ रोवत नइये, बल्कि भीतर ले ये सवाल करत हे कि अब नगोई गांव के डोर कोन थामही। परिवार सामाजिक अऊ प्रशासनिक रूप ले मजबूत हे, ये बात म कऊनो संदेह नइये। ओखर बड़े बेटा शिवेंद्र प्रताप कौशिक जिला पंचायत सदस्य हवंय, भतीजा भरत कौशिक उर्फ कल्लू डिप्टी कलेक्टर जइसने जिम्मेदार पद म हवंय। परिवार के लोग पत्रकारिता अऊ सामाजिक संगठनों म घलो सक्रिय हवंय। तिफरा निवासी ओखर मौसा बी.आर. कौशिक सहकारिता विभाग के सेवानिवृत्त लिपिक हवंय, जऊन अपन सेवा काल म ईमानदारी अऊ सरलता के पहचान रहिन। राधेश्याम के बड़े भाई रामकुमार कौशिक, सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षक, अपन जीवन भर शिक्षा अऊ संस्कार के दीप जरा के समाज ला दिशा दे हवंय।इतना सब कुछ होय के बाद घलो गांव जानथे कि पद, ओहदा अऊ अधिकार ले ही गांव नइ चलथे। गांव चलथे भावना ले, भरोसा ले अऊ अपनपन ले। राधेश्याम कौशिक कभू पद के मोहताज नइ रहिन। वो अपन कला, अपन बोली अऊ अपन व्यवहार ले गांव के नेतृत्व करिन। वो मंच म गाथे त नगोई बोलथे, वो समझाथे त विवाद खुदे शांत हो जाथे। आज नगोई गांव उनके बिना अनाथ जइसने महसूस करत हे।सच बात ये आय कि राधेश्याम कौशिक जइसने व्यक्तित्व बार-बार नइ मिलय। लेकिन अगर उनके सोच, उनके एकता के भावना अऊ उनके संस्कार ला परिवार अऊ गांव मिलके आगे बढ़ाही, त वो सच म अमर रहिहीं। आज नगोई गांव सिर झुकाए शोक म खड़ा हे, लेकिन आंख म उम्मीद अभी घलो बाकी हे। अब जिम्मेदारी सिरिफ परिवार के नइ, पूरा गांव के हवय कि राधेश्याम कौशिक के नाम अऊ काम ला याद म ही नइ, व्यवहार म जिंदा रखे जाही। एक लोक कलाकार चल बसिस, लेकिन नगोई के आत्मा आज घलो पूछत हे, अब हमन ला कोन जोड़ेही, कोन संभालेही, कोन राधेश्याम के सपना ला आगे ले जाही। हमर सर्वव्यापी अखबार के तरफ से ए महान आदमी ल शत् शत् नमन….


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