विकास नंद/ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़–ओड़िशा सीमा से लगे सरायपाली विधानसभा क्षेत्र के सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत जंगलबेड़ा में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना अब महज़ विकास की पहल नहीं रह गई है, बल्कि यह खुली राजनीतिक खींचतान का केंद्र बनती जा रही है। इस पूरे मामले को लेकर राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश प्रभारी सरला कोसरिया ने स्थानीय विधायक पर सीधा और तीखा आरोप लगाते हुए विवाद को जानबूझकर हवा देने का दावा किया है।सरला कोसरिया ने कहा कि शासन की स्पष्ट मंशा के अनुरूप गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड द्वारा ग्राम जंगलबेड़ा की शासकीय भूमि पर सोलर पावर प्लांट की स्थापना की जा रही है, लेकिन स्थानीय विधायक और उनके समर्थक कुछ छुटभैये नेताओं के साथ मिलकर भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह कर शासन के विरुद्ध भड़काने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह विकास-विरोधी राजनीति करार दिया।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिनांक 30 दिसंबर 2024 को ग्राम पंचायत जंगलबेड़ा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जा चुका है और पूरी पारदर्शिता के साथ सौर ऊर्जा परियोजना का कार्य आगे बढ़ रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र की शांत फिज़ा को बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है। सरला कोसरिया ने कहा कि ऐसे तत्वों का सरायपाली के विकास से कोई लेना-देना नहीं है।
प्रदेश सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ग्रामीण हितों को केंद्र में रखकर निरंतर काम कर रही है। सौर ऊर्जा जैसी परियोजनाएँ भविष्य की आवश्यकता हैं, जो न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देंगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, बुनियादी ढांचा और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देंगी। उनके अनुसार सरायपाली विधानसभा क्षेत्र आज तेज़ी से विकास के पथ पर अग्रसर है।
इधर, स्थानीय भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी विधायक पर बेवजह राजनीति करने का आरोप लगाया है। वरिष्ठ भाजपा नेता विपिन उबोवेजा ने कहा कि विधायक को शासन-प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए। केवल राजनीति चमकाने के लिए इस तरह विवाद को बढ़ाना अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरायपाली विधानसभा क्षेत्र में बिना भेदभाव लगातार विकास कार्यों की सौगात दी जा रही है, जिससे क्षेत्र का समुचित विकास संभव हो रहा है।
वहीं दूसरी ओर, परियोजना के विरोध में कुछ ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विधायक का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। इसी क्रम में कल सुबह से देर रात तक बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय नेता एवं विधायक अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय, सरायपाली पहुँचे।ग्रामीणों का आरोप है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार सरायपाली सहित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें कोई ठोस और संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया गया। स्पष्ट निर्णय या लिखित भरोसा न मिलने से नाराज़ ग्रामीण एसडीएम कार्यालय परिसर में ही डटे रहे।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में छत्तीसगढ़ के कई जिलों में प्रशासनिक संवादहीनता और निर्णय में देरी के कारण हालात बिगड़ चुके हैं, जिससे न केवल आमजन को नुकसान उठाना पड़ा बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ा।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते संतुलन, संवेदनशीलता और सख्ती के साथ हस्तक्षेप नहीं किया, तो जंगलबेड़ा में स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और जंगलबेड़ा में विकास बनाम राजनीति के इस टकराव को किस दिशा में ले जाता है।