विकास नंद/ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़–ओड़िशा सीमा से लगे सरायपाली विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ वनांचल ग्राम पंचायत जंगलबेड़ा में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना को लेकर विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड द्वारा शासकीय भूमि पर सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाने के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।परियोजना के खिलाफ ग्रामीण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ क्षेत्रीय विधायक का भी समर्थन प्राप्त है। इसी कड़ी में मंगलवार देर रात बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय नेता एवं विधायक अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर एसडीएम कार्यालय, सरायपाली पहुँचे।ग्रामीणों का आरोप है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार सरायपाली सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उन्हें कोई ठोस एवं संतोषप्रद आश्वासन नहीं दिया गया। स्पष्ट निर्णय या लिखित भरोसा न मिलने से नाराज़ ग्रामीण एसडीएम कार्यालय परिसर में ही डटे हुए हैं।उल्लेखनीय है कि बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में प्रशासनिक लापरवाही और संवादहीनता के चलते आमजन को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे मामलों में जनआक्रोश बढ़ने से कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हुई है, जिससे शासन-प्रशासन की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा।स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते संवेदनशीलता और सख्ती के साथ हस्तक्षेप नहीं किया, तो ग्राम जंगलबेड़ा में हालात और अधिक चिंताजनक हो सकते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को तत्काल ग्रामीणों और सौर ऊर्जा कंपनी के बीच शांतिपूर्ण संवाद स्थापित कर, सभी पक्षों की बात सुनते हुए इस विवाद का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।प्रशासनिक पहल और स्पष्ट कार्रवाई से ही क्षेत्र में शांति बनाए रखी जा सकती है तथा किसी भी संभावित अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या से बचा जा सकता है। फिलहाल, यह देखना शेष है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और विवाद का समाधान कब और किस तरह करता है।