शिवाजी महाराज जैसे पराक्रम व शौर्य का प्रयोग समाज एवं देश के लिए करें : कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा।

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तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी

आज का दिन छत्रपति शिवाजी महाराज शौर्य, साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को अनुकरण करने का दिन है। वे हमें सिखाते हैं कि हमारा अपने देश के साथ कैसा संबंध होना चाहिए और एक व्यक्ति अपने पराक्रम व शौर्य का प्रयोग अपने समाज एवं देश के लिए कैसे। हमें छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रेरक कार्य को आगे बढ़ाते हुए विकसित भारत में अपना योगदान देना चाहिए। यह विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो कुमुद शर्मा ने व्यक्त किए। छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के शुभ अवसर पर द ब्लूस स्पोर्ट्स अकादमी, वर्धा द्वारा 4वां जेनिथ फेलिसिटेशन 2025-26 का आयोजन 19 फरवरी को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कस्तूरबा सभागार में किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र गादेवार, कुलानुशासक डॉ. राकेश मिश्र के हाथों वर्धा और आसपास के 100 से अधिक जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने वाले युवा खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने आगे कहा कि द ब्लूस स्पोर्ट्स अकादमी और विश्वविद्यालय के बीच का सहयोग समाज को अत्यधिक लाभान्वित कर रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का दायित्व है कि वह आसपास के समुदाय को विकास के अवसर प्रदान करें। यदि हम अपने बच्चों, किशोरों व युवाओं में खेल के प्रति रुझान जगाते हैं, तो यह विकसित भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।गौरतलब है कि वर्धा और आसपास के युवा खिलाड़ियों को एथलीट प्रशिक्षण हेतु विश्वविद्यालय का मेजर ध्यानचंद क्रीड़ा स्थल मुहैया कराया गया है। विश्वविद्यालय और अकादमी के बीच इस सहयोग से स्थानीय खेल प्रतिभाओं को एक उत्कृष्ट मंच प्राप्त हुआ है।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद एथलीटों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के पारंपरिक मंत्र “राजा शिवछत्रपती महाराजांचा विजय असो!” को वैभवपूर्ण नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से समर्पित किया। कार्यक्रम का संचालन निमिश मुले और ओम गुडधे ने किया। डॉ. संदीप सपकाले ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि बच्चों के खेल मैदान में हार-जीत मोबाइल गेम की हार-जीत से बिल्कुल अलग है, क्योंकि खेल से चरित्र निर्माण होता है।समारोह का एक स्पर्श-मुहूर्त तब हुआ जब कुलपति प्रो. शर्मा ने तीन वर्षीय एथलीट ‘राम’ को अपनी गोद में लिया। इस प्रतिभाशाली बालक ने 50 मीटर तैराकी में पदक जीता है और मात्र 2.5 वर्ष की उम्र से ही प्रशिक्षण ले रहा है।इस समारोह में तैराकी, एथलेटिक्स, मॉडर्न पेंटाथलॉन और शतरंज जैसे विविध खेलों को प्रोत्साहन दिया गया। सम्मानित खिलाड़ियों में राष्ट्रीय स्तर की युवा खिलाड़ी मधुरा प्रशांत पहाड़े, अर्णव पंकज साल्वे, श्रावणी अभय बोबड़े शामिल हैं। राज्य स्तर के खिलाड़ी प्रतीक सिंह, अर्णव उमेश डहाके, आर्श प्रशांत राऊत तथा जिला और मंडल स्तर के आराध्या प्रवीण मानकर, ज्ञानदा देशमुख और अन्य 100 से अधिक खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सेवाग्राम के डॉ. हर्षल साठे और डॉ. अभिषेक राऊत ने बच्चों को खेल और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। द ब्लूज़ स्पोर्ट्स अकादमी के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश मेहरे ने भी समारोह में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुलपति प्रो. शर्मा ने प्रशिक्षकों सुनील रोहनकर, आशीष बीडबाईक, प्रवीण मोहले एवं डॉ. मुले ने द्वारा विजय वैरागडे को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया। राधा मुले ने अभिभावकों को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम की एक अनोखी और सराहनीय पहल यह रही कि सभी सम्मानित खिलाड़ियों को सीडबॉल्स (बीज गोले) वितरित किए गए। अकादमी के आदर्श वाक्य “From Pool to Plants, Nurturing the Future” के अनुसार, यह पहल खेल के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करती है।समारोह के समापन पर द ब्लूस स्पोर्ट्स अकादमी के निदेशक ने कहा, जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने समय में नई परंपराएं स्थापित कीं, वैसे ही हमारे युवा खिलाड़ी भी खेल जगत में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। हमारा लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना है।”यह कार्यक्रम न केवल खिलाड़ियों के लिए प्रेरणाप्रद था, बल्कि समुदाय में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ। छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को जीवंत रखते हुए, यह कार्यक्रम युवाओं को अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति की शिक्षा देता है,एक ऐसा संदेश जो आगामी पीढ़ी के लिए अमूल्य है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


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