गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/ नूर मोहम्मद ,ब्यूरोचीफ, सर्वव्यापी
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल में शासनादेशों की अवहेलना और पद के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। वर्तमान डीएफओ ग्रीष्मी चाँद पर आरोप है कि दर्जनों शिकायतों के बावजूद दोषी कर्मियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया गया।विभागीय जानकारी के अनुसार जनप्रतिनिधियों व अन्य शिकायतों के आधार पर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मियों के स्थानांतरण का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जिला कलेक्टर के माध्यम से सत्यापन सूची वन मंडल कार्यालय पहुंची, लेकिन डीएफओ ने “स्टाफ की कमी” का हवाला देकर शासन को गुमराह किया और दागी कर्मियों को बचा लिया। विरोध को शांत करने के लिए अपने ही आदेश से 11 वनपाल और 11 वनरक्षकों को मंडल के भीतर अन्य स्थानों पर ड्यूटी लगाने का आदेश जारी किया गया, पर आश्चर्यजनक रूप से एक भी कर्मी ने आदेश का पालन नहीं किया और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।आरोपों में यह भी शामिल है कि राज्य स्तर से स्थानांतरित किए गए सुरेश राठौर को आज तक भारमुक्त नहीं किया गया। सीसीएफ बिलासपुर द्वारा मरवाही से सामाजिक वानिकी में मूल पदस्थापना किए जाने के बावजूद मान सिंह स्याम को भी भारमुक्त नहीं किया गया, उल्टे उन्हें उड़न दस्ता प्रभारी बनाकर वसूली जैसे कार्य सौंपे गए। छह बार निलंबित रहे वनपाल उदय तिवारी को केंद्रीय नर्सरी साधवानी में पोस्टिंग, वहीं गबन व कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित वनरक्षक राकेश राठौर को उसी स्थान पर एक सप्ताह में बहाल कर पोस्टिंग – इन फैसलों को नियमों की खुली अवहेलना बताया जा रहा है।इसके अलावा, केम्पा प्रभारी भूपेंद्र साहू को हटाने के आदेश के बाद भी उनसे कार्य लिया जाना, गबन के आरोपों के बावजूद शिव शंकर तिवारी को परिक्षेत्र सहायक मरवाही व केंद्रीय नर्सरी चिकगोहन का प्रभार, मुख्य लिपिक शैल गुप्ता को अतिरिक्त प्रभार पर लंबे समय तक बनाए रखना, तथा गबन सिद्ध होने के बाद भी रमेश रजक का परिक्षेत्र सहायक पद पर बने रहना, इन सबने डीएफओ पद की गरिमा पर सवाल खड़े किए हैं। लकड़ी तस्करी के प्रमाणित मामलों में भी कार्रवाई न होना आरोपों को और गंभीर बनाता है। इस मामले पर डीएफओ ग्रीष्मी चांद कहते हैं कि कार्रवाई की गई है लेकिन कार्रवाई संबंधित कोई भी विभागीय आदेश सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। बताया गया है कि ग्राम उषाड़ के सरपंच और वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने डीएफओ मरवाही के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, मुख्य सचिव और वन विभाग को शिकायत भेजी है। अब देखना यह है कि शासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है।