तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र और बिल्हा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भाड़ी निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता ज्योतिष कश्यप का राजनीतिक और सामाजिक जीवन लंबे संघर्ष, संगठनात्मक निष्ठा और परिणाम देने वाले कार्यों से भरा रहा है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी बैंक की “नई पहचान” के दौर के रूप में याद किया जाता है। जहां संस्थागत मजबूती, भरोसे की वापसी और कार्य संस्कृति में सुधार दिखा।मंडल से लेकर जिला स्तर तक संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। किसान हों, विद्यार्थी हों या समाज का कोई भी वर्ग ज्योतिष कश्यप ने संवाद, संगठन और समर्पण के जरिए लोगों को पार्टी से जोड़ने का काम किया। यही कारण है कि 14 फरवरी को 60 वर्ष पूर्ण करने के बावजूद वे आज भी एक सक्रिय, ऊर्जावान और “युवा चेहरे” के रूप में पहचाने जाते हैं।इसके बावजूद, दुर्भाग्यपूर्ण सच यह है कि ऐसे कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता आज उपेक्षा का शिकार दिखाई पड़ रहे हैं। पार्टी के भीतर उनकी भूमिका, अनुभव और योगदान को न तो अपेक्षित सम्मान मिल रहा है और न ही जिम्मेदारियों में वह स्थान, जिसके वे हकदार रहे हैं। यह उपेक्षा तब और चौंकाती है जब उन्हें पूर्व राज्यपाल रमेश बैस का करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है।चिंताजनक पहलू यह भी है कि जिला संगठन की बात तो दूर, स्वयं बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता भी ज्योतिष कश्यप को लगातार दरकिनार करते नजर आते हैं। संगठन में वर्षों तक पसीना बहाने वाले नेता का इस तरह हाशिए पर जाना कई सवाल खड़े करता है—क्या संगठन अनुभव की कद्र भूल रहा है? क्या जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा भविष्य की रणनीति पर भारी पड़ेगी?यह मामला केवल एक व्यक्ति की अनदेखी का नहीं, बल्कि संगठनात्मक आत्ममंथन का है। यदि पार्टी अपने समर्पित सिपाहियों की भूमिका को समय रहते नहीं पहचानती, तो जमीनी पकड़ कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है। ज्योतिष कश्यप जैसे नेताओं का अनुभव, नेटवर्क और जनविश्वास आज भी संगठन की बड़ी ताकत बन सकता है, बशर्ते उसे सम्मान और अवसर दिया जाए।