तरुण कौशिक, संपादक ,सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उद्योग विभाग के विज्ञापन दिनांक 23 अक्टूबर 2024 के तहत आयोजित बॉयलर निरीक्षक भर्ती परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए एक आवेदक ने सीधे राज्यपाल को शिकायत पत्र सौंपा है।आवेदन पत्र में कहा गया है कि CGPSC प्रदेश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था है, लेकिन पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल 2021–22 में सामने आए पीएससी घोटाले के बाद भी आयोग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उस समय हुए घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट तक पहुँची और कई आरोपी जेल भेजे गए, इसके बावजूद अब फिर से संदिग्ध नियुक्तियों के आरोप सामने आए हैं।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बॉयलर निरीक्षक पद (कॉमर्स एवं इंडस्ट्रियल साइंस) की भर्ती प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी कानन वर्मा को नियुक्त किया गया, जबकि वह भर्ती विज्ञापन में निर्धारित आयु-सीमा की पात्रता में नहीं आता था। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए नियुक्ति दे दी गई, जो CGPSC की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। मामले की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि उक्त भर्ती के खिलाफ एक अन्य अभ्यर्थी द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश WPS No. 6748 of 2025, दिनांक 17.02.2026 में स्पष्ट टिप्पणी की कि कानन वर्मा की नियुक्ति पूरी तरह अनुचित है और उन्हें गलत तरीके से लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया।शिकायतकर्ता ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान CGPSC में नियुक्त किए गए तीन सदस्य—प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान और सरिता उइके—की भूमिका पहले भी संदिग्ध रही है।यह भी आरोप है कि कानन वर्मा, सदस्य प्रवीण वर्मा के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं, जिससे हितों के टकराव और पक्षपात की आशंका और गहराती है।आवेदन में यह उल्लेख भी किया गया है कि पूर्व के पीएससी घोटाले में भी यही तीनों सदस्य जांच के दायरे में रहे और उनके सामने घोटाले को अंजाम दिया गया था, ऐसे में अब दोबारा इनका नाम सामने आना अत्यंत गंभीर विषय है। आवेदनकर्ता ने रमेन डेका से मांग की है कि CGPSC जैसी संवैधानिक संस्था की साख बनाए रखने के लिए।बॉयलर निरीक्षक भर्ती प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएपूर्व पीएससी घोटाले में इन सदस्यों की भूमिका की भी पुनः समीक्षा होदोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएशिकायतकर्ता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा।