हिंसा छोड़, शांति को चुना… आत्मसमर्पित नक्सलियों ने हथियार त्याग थामा तिरंगा और संविधान।

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विकास नंद/सर्वव्यापी/

नक्सलवाद के विरुद्ध चल रही निर्णायक लड़ाई में एक बड़ी सफलता दर्ज करते हुए बरगढ़–बलांगीर–महासमुंद डिविजनल कमेटी (DBM) से जुड़े 15 इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने अपने पास मौजूद हथियार छोड़ते हुए तिरंगा और भारतीय संविधान के प्रति आस्था व्यक्त की तथा शांति, विकास और लोकतंत्र के मार्ग पर चलने की घोषणा की।यह आत्मसमर्पण “पुनः मार्गम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के अंतर्गत हुआ, जिसके तहत शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, संवाद प्रक्रिया और सतत अपील का सकारात्मक असर देखने को मिला। आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान सभी नक्सलियों को तिरंगा भेंट कर सम्मानित किया गया और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान 14 आधुनिक हथियार भी सौंपे गए, जिनमें एके-47, एसएलआर, इंसास, .303 राइफल एवं 12 बोर शामिल हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा राज्य समिति का पश्चिमी सब-जोन पूरी तरह समाप्त हो गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के रायपुर पुलिस रेंज के साथ-साथ ओडिशा का संबलपुर रेंज भी नक्सलमुक्त होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज कर चुका है। यह उपलब्धि मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की ओर एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि लगातार जंगलों में भटकने, पारिवारिक जीवन से दूरी, भय और असुरक्षा से त्रस्त होकर उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का निर्णय लिया। शासन की पुनर्वास नीति, आजीविका, स्वास्थ्य सुविधा और सम्मानजनक जीवन की संभावनाओं ने उन्हें नई राह चुनने के लिए प्रेरित किया।प्रशासन ने शेष बचे नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार त्याग कर संविधान और तिरंगे के प्रति निष्ठा जताएं तथा विश्वास, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।


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