15 मार्च से जिले में डोर-टू-डोर एफएमडी टीकाकरण अभियान शुरू।

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विकास नंद/सर्वव्यापी/

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 से संचालित National Animal Disease Control Programme (NADCP) के अंतर्गत एफएमडी नियंत्रण कार्यक्रम जिले में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2025 तक खुरहा-चपका (एफएमडी) रोग को नियंत्रित करना तथा 2030 तक देश को इस बीमारी से मुक्त करना है। कार्यक्रम के तहत व्यापक टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार एफएमडी राउंड-7 के अंतर्गत महासमुंद जिले में 15 मार्च 2026 से डोर-टू-डोर टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया जाएगा। उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने बताया कि पशुधन विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर गोवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं का टीकाकरण करेगी। इस दौरान प्रत्येक पशु का विवरण भारत पशुधन पोर्टल में दर्ज किया जाएगा, जिससे निगरानी और रिकॉर्ड संधारण को और सुदृढ़ बनाया जा सके।इसके साथ ही 1 मार्च 2026 से जिले में पशुओं को कृमिनाशक दवा पिलाने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे अपने पशुओं को समय पर कृमिनाशक दवा अवश्य दिलवाएं, ताकि पशु स्वस्थ रहें और टीकाकरण का बेहतर लाभ मिल सके।उपसंचालक ने बताया कि खुरहा-चपका (एफएमडी) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है। यह पिकोर्ना वायरस के कारण फैलता है और संक्रमित पशुओं के संपर्क, दूषित चारा-पानी, उपकरणों, वाहनों तथा हवा के माध्यम से तेजी से फैल सकता है। इस रोग से पशुओं के मुंह, पैरों और थनों पर दर्दनाक छाले, तेज बुखार, दूध उत्पादन में गिरावट, गर्भपात और वजन में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।एफएमडी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। सामान्यतः 4 से 6 माह की आयु के पशुओं को पहला टीका लगाया जाता है, जिसके बाद 6 से 12 माह के अंतराल में बूस्टर डोज दी जाती है। इससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उनकी उत्पादन क्षमता में भी सुधार होता है।अधिकारियों ने बताया कि टीकाकरण के साथ-साथ संक्रमित पशुओं को अलग रखना, स्वच्छता बनाए रखना, उपकरणों एवं वाहनों की नियमित सफाई तथा पशुओं की अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगाना भी आवश्यक है। सभी पशुपालकों से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की गई है, ताकि जिले को खुरहा-चपका रोग से सुरक्षित बनाया जा सके और पशुपालन को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त किया जा सके।


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