तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला के जनपद पंचायत गौरेला अंतर्गत ग्राम पंचायत झगराखण्ड में 10 लाख रुपये की पुलिया निर्माण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और वार्ड क्रमांक 3 की पंच ने आरोप लगाया है कि सरपंच, सचिव और संबंधित इंजीनियर ने मिलीभगत कर शासन को लाखों रुपये का चूना लगाने की कूटरचना की है।ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थल पर पूर्व पंचवर्षीय कार्यकाल में 5 लाख रुपये की पुलिया पहले से निर्मित थी, उसी स्थान पर दोबारा 10 लाख रुपये की नई पुलिया की स्वीकृति प्राप्त कर ली गई। आरोप है कि आवश्यकता न होने के बावजूद योजना स्वीकृत कराई गई और जांच की आहट मिलते ही मात्र 10 दिनों के भीतर आनन-फानन में निर्माण कार्य पूर्ण करा दिया गया।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुली अनदेखी की गई। न तो ढंग से तराई की गई और न ही पुलिया को पर्याप्त समय तक पकने दिया गया। प्राक्कलन के अनुरूप कार्य न करते हुए स्थानीय ट्रैक्टरों से बिना रॉयल्टी रेत-गिट्टी की आपूर्ति कराई गई तथा कथित रूप से निम्न गुणवत्ता की सीमेंट का उपयोग किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि 10 लाख रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध लगभग 3 लाख रुपये के आसपास ही खर्च कर निर्माण पूरा दिखा दिया गया।मामले की शिकायत जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से की गई, जिस पर जांच टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से बचने और राशि के भुगतान को सुरक्षित करने के उद्देश्य से ही जल्दबाजी में निर्माण पूरा कराया गया।स्थानीय ग्रामीणों और पंचों ने जिला पंचायत के सीईओ एवं कलेक्टर से मांग की है कि बिना निष्पक्ष जांच के 10 लाख रुपये की स्वीकृत राशि का भुगतान जारी न किया जाए। साथ ही संबंधित इंजीनियर को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच तथा राशि की वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में जांच के बाद दोषियों पर शिकंजा कसा जाता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।