तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित मोहभट्टा गांव का स्वयंभू महादेव मंदिर मोहभट्टा आज श्रद्धा, आस्था और चमत्कार का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मान्यता है कि यहां भगवान भगवान शिव का शिवलिंग किसी मानव द्वारा स्थापित नहीं किया गया, बल्कि यह एक पेड़ की जड़ के नीचे स्वयं प्रकट हुआ था, जिसके कारण इसे “स्वयंभू महादेव” के नाम से जाना जाता है।मंदिर के पुजारी तिलकपुरी गोस्वामी के अनुसार यह पवित्र स्थल सौ वर्षों से भी अधिक पुराना है। प्रारंभिक समय में यहां केवल एक वृक्ष की जड़ के नीचे शिवलिंग दिखाई दिया था, जहां आसपास के ग्रामीण श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने लगे। धीरे-धीरे इस स्थान की महिमा दूर-दूर तक फैलती गई और जनसहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, जो आज एक विशाल आस्था स्थल का रूप ले चुका है।मंदिर परिसर में हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर पांच दिवसीय महायज्ञ, भव्य धार्मिक अनुष्ठान और विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां दर्शन करने आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।यह पवित्र मंदिर चकरभाठा-रहंगी रेलवे फाटक के समीप स्थित है, जिसके कारण यहां पहुंचना भी काफी सुगम है। धीरे-धीरे यह स्थान न केवल आसपास के गांवों बल्कि पूरे बिलासपुर क्षेत्र के लिए प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि स्वयंभू महादेव की यह नगरी सदियों से आस्था की ज्योति जलाए हुए है और यहां आने वाले हर भक्त को आध्यात्मिक शांति और विश्वास की नई ऊर्जा प्राप्त होती है।