विकास नंद/ सर्वव्यापी/
महासमुंद की सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमशीला बघेल को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में “इंटरनेशनल वूमेंस विजनरी अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा दिल्ली के वाईएमसीए हॉल में आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किया गया।कार्यक्रम में पूर्व सदस्य पैनल ऑफ चेयरपर्सन 17वीं लोकसभा रमादेवी, अभिनेता एवं निर्माता राजीव मेनन, अभिनेत्री नुज़रथ जहाँ, सदस्य मनीष गवई तथा संगठन की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जयलक्ष्मी राव सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।प्रेमशीला बघेल को यह पुरस्कार महिला एवं बाल सशक्तिकरण, डिजिटल वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका विकास के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों से किए जा रहे उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया। वे करीब 30 वर्षों से गरीब, दलित, आदिवासी तथा ग्रामीण-शहरी महिलाओं के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही हैं।उन्होंने वर्ष 1994 में मात्र 300 रुपये मानदेय पर बालवाड़ी शिक्षिका के रूप में अपनी सामाजिक यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने 1,500 से अधिक स्व-सहायता समूहों का गठन कर 15 हजार से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से 1,000 से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुलवाए गए तथा 50 लाख रुपये से अधिक की माइक्रो-क्रेडिट लिंकिंग कराई गई। साथ ही 850 से अधिक महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल लेन-देन का प्रशिक्षण भी दिया गया।वर्ष 2005 में उन्होंने “उन्नयन जन विकास समिति” की स्थापना की, जिसके माध्यम से 2,200 से अधिक महिलाओं और युवाओं को साबुन निर्माण, बांस शिल्प, टेराकोटा, हाथकरघा, जैविक खेती सहित विभिन्न आजीविका कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। उनके प्रयासों से 7,500 से अधिक ग्रामीणों तक जागरूकता अभियान पहुंचा और 30 गांवों में बाल विवाह व शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को कम करने में भी सफलता मिली।डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में उन्होंने नाबार्ड के ई-शक्ति कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों का डिजिटलीकरण कराया तथा महिलाओं को यूपीआई, डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैलेंस जांच और मोबाइल रिकॉर्ड कीपिंग का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा महासमुंद रेलवे स्टेशन के पास “मां की रोटी” नाम से महिला कैंटीन की स्थापना कर महिलाओं को स्वरोजगार से भी जोड़ा गया।प्रेमशीला बघेल वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए महिलाओं की गरीबी और हिंसा से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उठा चुकी हैं। उन्हें वर्ष 2025 में देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के “वीरांगना अवंतीबाई लोधी पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा नाबार्ड, जिला प्रशासन, मीडिया समूहों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है। वे वर्तमान में श्रम विभाग की जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की सदस्य भी हैं।महिला दिवस के अवसर पर प्रेमशीला बघेल ने संदेश दिया कि जब नारी शक्ति आत्मविश्वास, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ती है, तब समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उनके प्रयासों से हजारों महिलाओं में आत्मनिर्भरता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व की नई चेतना विकसित हो रही है।