संपादक के कलम से…. नारी सम्मान ले समाज के असली पहचान।

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तरुण कौशिक, संपादक

आज पूरा दुनिया म अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाय जावत हे। ए दिन सिरिफ उत्सव मनाय के दिन नई, बल्कि समाज म महिला मन के योगदान, संघर्ष अऊ सम्मान ला याद करे के दिन आय। नारी सिरिफ घर-परिवार तक सीमित नई रहिगे, बल्कि आज वो समाज, देश अऊ दुनिया के विकास के हर क्षेत्र म अपन महत्वपूर्ण भूमिका निभावत हे।हमर समाज म महिला के स्थान हमेशा ले खास रहिस। एक माई के रूप म वो परिवार के संस्कार गढ़थे, एक बहिनी के रूप म मया अऊ अपनापन के रिश्ता निभाथे, अऊ एक बेटी के रूप म घर-आंगन के रौनक बनथे। महिला के बिना परिवार के कल्पना घलो अधूरा हे। समाज के नींव मजबूत करे म महिला मन के योगदान सबसे अधिक रहिथे।छत्तीसगढ़ी संस्कृति म नारी के सम्मान ला बहुत महत्व देय जाथे। यहां “माटी, माई अऊ मया” तीनों ला एक समान सम्मान मिलथे। गांव-गांव म महिला मन खेती-बाड़ी ले लेकर घर-परिवार के जिम्मेदारी तक निभाथें। वो बिहान ले रात तक परिवार अऊ समाज बर मेहनत करत हें, फेर अपन मेहनत अऊ त्याग के चर्चा अक्सर कमेच होथे।आज के आधुनिक समय म महिला मन शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, चिकित्सा, विज्ञान, खेल, पत्रकारिता अऊ व्यवसाय जइसन कई क्षेत्र म अपन पहचान बना चुके हें। आज देश के कई बड़े पद म महिला मन पहुंच चुके हें, जेन ये बात साबित करथे कि अगर अवसर मिलय त महिला मन कऊनो भी क्षेत्र म पुरुष ले कम नई हें।फेर ए प्रगति के बावजूद समाज म कई चुनौती अभी घलो मौजूद हें। कई जगा आज घलो बेटी के पढ़ई म भेदभाव देखे जाथे, कई महिला मन घरेलू हिंसा, सामाजिक दबाव अऊ असमानता के सामना करत हें। कई बार उनके मेहनत अऊ प्रतिभा ला वो सम्मान नई मिल पाथे, जेन वो ल मिलना चाही।महिला दिवस हमन ला ये सोचइया बनाथे कि समाज के असली विकास तब होही जब महिला मन ला समान अधिकार, शिक्षा अऊ सुरक्षा मिलही। बेटी पढ़ही त परिवार पढ़ही, परिवार पढ़ही त समाज अऊ देश दूनों आगे बढ़ही।महिला सिरिफ सहनशीलता के प्रतीक नई, बल्कि शक्ति, साहस अऊ बदलाव के प्रतीक घलो आय। इतिहास गवाह हे कि जब-जब समाज म बदलाव के जरूरत पड़िस, तब-तब महिला मन अपन साहस अऊ संकल्प ले समाज ला नई दिशा दिस हें।आज जरूरत ए बात के आय कि हमन महिला मन ल सिरिफ सम्मान के शब्द तक सीमित नई रखन, बल्कि व्यवहार म घलो बराबरी अऊ सम्मान देवन। बेटी के पढ़ई, महिला के सुरक्षा अऊ उनके आत्मनिर्भरता बर समाज के हर वर्ग ल आगे आना चाही।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हमन ला ये घलो याद दिलाथे कि महिला मन के सम्मान सिरिफ एक दिन के कार्यक्रम नई, बल्कि रोज के व्यवहार म दिखना चाही। जब तक हर बेटी सुरक्षित अऊ शिक्षित नई होही, जब तक हर महिला अपन अधिकार के साथ जीये के स्वतंत्रता नई पाही, तब तक समाज के विकास अधूरा रहिही।आज महिला मन हर क्षेत्र म अपन काबिलियत साबित कर दिस हें। वो घर के जिम्मेदारी निभावत-निभावत समाज अऊ देश के विकास म घलो बराबरी के भागीदारी निभावत हें। ए बात समाज के हर आदमी ल समझना चाही कि महिला मन कमजोर नई, बल्कि समाज के सबसे मजबूत आधार हें।आज महिला दिवस के अवसर म हमन सब मिलके ये संकल्प लेवन कि समाज म महिला मन के सम्मान, शिक्षा अऊ सुरक्षा ल सबसे ऊपर रखबो। बेटी ल अवसर देबो, महिला ल सम्मान देबो अऊ समाज म बराबरी के वातावरण बनाबो।काबर कि जिहां नारी के सम्मान होथे, उहां समाज के विकास अऊ संस्कृति दूनों फलथें-फूलथें। नारी के सम्मान म ही समाज के असली पहचान छुपे हे।


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