
गौरेला -पेंड्रा-मरवाही,नूर मोहम्मद, श्रीनिवास सुमेर, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
बिलासपुर संभागीय मुख्यालय के आर्या कॉलोनी रोड तिफरा, निवासी सहकारिता विभाग के सेवानिवृत्त लिपिक बी.आर. कौशिक ने अपने नतनीन पोती गेरांगना एवं भारती कौशिक के विवाह के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के सम्मान का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया है।जहां सामान्यतः विवाह समारोहों में निमंत्रण पत्र हिंदी या अंग्रेजी में छपवाए जाते हैं, वहीं बी.आर. कौशिक ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजभाषा छत्तीसगढ़ी में निमंत्रण कार्ड छपवाकर लोगों को आमंत्रित किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से लगे अपने नवनिर्मित भवन में विवाह कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दीवारों पर भी आकर्षक छत्तीसगढ़ी दीवार लेखन के माध्यम से मेहमानों का स्वागत किया गया।दीवार लेखन में छत्तीसगढ़ी भाषा में संदेश लिखा गया है-“छत्तीसगढ़ी सिरिफ बोली नई आय… ए हमर माटी, हमर मान… हमर पहचान आय..!”इसके साथ ही दीवारों पर मेहमानों के स्वागत के भाव को दर्शाते हुए- “सुभ बिहाव” और “कौशिक परिवार आप सबों के स्वागत करत हे…” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। वहीं दीवार लेखन में क्षेत्रीय पहचान को दर्शाते हुए- “हमर सुघ्घर ऊर्जा विहार छतौना” तथा “जय छत्तीसगढ़ महतारी” भी लिखा गया है।खास बात यह है कि यह संदेश केवल दीवार लेखन तक ही सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विवाह के लिए छपवाए गए निमंत्रण पत्र और मेहमानों के लिए तैयार किए गए उपहार के थैलों पर भी यही संदेश छत्तीसगढ़ी में अंकित कराया गया है-“छत्तीसगढ़ी सिरिफ बोली नई आय… ए हमर माटी, हमर मान… हमर पहचान आय..!”इस पहल के माध्यम से बी.आर. कौशिक ने एक पारिवारिक आयोजन को छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के सम्मान से जोड़ते हुए समाज के सामने प्रेरणादायक संदेश प्रस्तुत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में जब लोग अपनी मातृभाषा से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे प्रयास न केवल छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान को बढ़ाते हैं बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और माटी से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।एक पारिवारिक विवाह समारोह के माध्यम से छत्तीसगढ़ी अस्मिता को इस तरह सम्मान देने की पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।