ग्रीन क्रेडिट योजना में पौधा तैयारी के नाम पर करोड़ों का घोटाला, 3 लाख टॉल प्लांट्स कागजों में तैयार दिखाकर 1.80 करोड़ की बंदरबांट का आरोप।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के वन विभाग के मरवाही वन मंडल में ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत पौधा तैयारी के नाम पर बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि लगभग 3 लाख टॉल प्लांट्स पौधों की फर्जी तैयारी दिखाकर करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये की राशि का गबन किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, ग्रीन क्रेडिट योजना के अंतर्गत मरवाही वन मंडल के मरवाही, पेंड्रा, गौरेला और खोड़री वन परिक्षेत्रों में 500 हेक्टेयर सिंचित प्लांटेशन के लिए टॉल प्लांट्स पौधों की तैयारी और रोपण प्रस्तावित था। आरोप है कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर पौधों की तैयारी केवल कागजों में दर्शाई और प्रति पौधा 60 रुपये की दर से लगभग 1.80 करोड़ रुपये की राशि फर्जी तरीके से निकाल ली।विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में रोपणी प्रभारी, रेंजर और एसडीओ स्तर तक के अधिकारियों की मिलीभगत बताई जा रही है। आरोप है कि फर्जी बिल-बाउचर तैयार कर कुछ फर्मों से सांठगांठ की गई और मजदूरों के नाम पर भी फर्जी भुगतान दिखाकर राशि निकाल ली गई।बताया जा रहा है कि जिन पौधों को ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत तैयार दिखाया गया, उनकी जगह महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से स्वीकृत पौधों को रोपण में उपयोग कर दिया गया, जबकि कागजों में टॉल प्लांट्स तैयार करना दर्शाया गया।सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में नर्सरी प्रभारी, परिक्षेत्र अधिकारी, एसडीओ और संबंधित शाखा के लिपिकीय स्टाफ की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि यह एक संगठित आर्थिक अनियमितता का मामला प्रतीत होता है।सूत्रों ने यह भी बताया कि इस घोटाले की एक बड़ी विसंगति यह है कि टॉल प्लांट्स पौधे केवल चार महीने में तैयार दिखा दिए गए, जबकि सामान्यतः एक टॉल प्लांट्स पौधा तैयार होने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है।इस मामले में जांच की मांग उठने लगी है। सूत्रों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि पौधा तैयारी की स्वीकृति किस तारीख को दी गई, सामग्री आपूर्ति का आदेश कब और किस फर्म को दिया गया, सप्लाई चालान, परिवहन चालान और बीज क्रय के दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। साथ ही अपलोड किए गए फोटोग्राफ और स्थल निरीक्षण के आधार पर भी जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में रोपणी प्रभारी साधवानी, उदय तिवारी, राकेश राठौर, चिचगोना रोपणी प्रभारी शिवशंकर तिवारी, राकेश पंकज और इंदिरा उद्यान रोपणी प्रभारी परिक्षेत्र सहायक पेंड्रा सहित अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की जा रही है।यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो ग्रीन क्रेडिट योजना में हुए इस कथित घोटाले की परतें खुल सकती हैं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई संभव है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!