गौरेला -पेंड्रा-मरवाही/ नूर मोहम्मद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
बारह वर्षों तक लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहने के बाद एक महिला द्वारा अपने ही पूर्व प्रेमी पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने और साथ ही कुटुंब न्यायालय में अंतरिम भरण-पोषण के रूप में 70 हजार रुपए तथा नियमित भरण-पोषण के तौर पर डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह की मांग करने का मामला अब कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब महिला ने स्वयं न्यायालय और पुलिस के सामने 12 वर्षों तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की बात स्वीकार की है, तो फिर बलात्कार का आरोप किस आधार पर लगाया गया और दूसरी ओर उसी व्यक्ति से भरण-पोषण की मांग कैसे की जा रही है।सूत्रों के अनुसार संबंधित पुरुष पक्ष ने कुटुंब न्यायालय में यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों लंबे समय तक आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बावजूद महिला ने एक ओर पुलिस में बलात्कार की एफआईआर दर्ज कराई और दूसरी ओर उसी व्यक्ति से भरण-पोषण की मांग करते हुए न्यायालय में याचिका दायर कर दी।कानूनी जानकारों का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर न्यायपालिका पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि यदि दो वयस्क लंबे समय तक आपसी सहमति से साथ रहते हैं, तो उनके बीच बने शारीरिक संबंधों को सामान्यतः सहमति का संबंध माना जाता है। ऐसे मामलों में बाद में उत्पन्न विवादों को लेकर अदालतों को तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निर्णय करना पड़ता है।इस पूरे मामले ने एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति पर बलात्कार जैसा गंभीर आरोप लगाया गया है, तो क्या वही व्यक्ति भरण-पोषण देने के लिए बाध्य हो सकता है? वहीं दूसरी ओर यदि संबंध सहमति से था, तो क्या बलात्कार की एफआईआर दर्ज करना न्याय व्यवस्था के समय और संसाधनों का दुरुपयोग नहीं है?कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा बिना गहराई से जांच किए एफआईआर दर्ज कर देना भी न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा देता है। परिणामस्वरूप अदालतों को वर्षों तक ऐसे विवादों की सुनवाई करनी पड़ती है, जिनमें संबंधों की प्रकृति ही विवाद का केंद्र बन जाती है।समाज में बढ़ते लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों के बीच यह प्रकरण एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां कानून, नैतिकता और व्यक्तिगत संबंधों की जटिलता आपस में टकराती नजर आ रही है। अब सभी की निगाहें न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि बारह साल तक साथ रहने के बाद लगाए गए बलात्कार के आरोप और भरण-पोषण की मांग के बीच कानून किसे सही मानता है।