तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर हाल के दिनों में उठे सवालों और चर्चाओं के बीच एक तथ्य स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आता है—कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी का नेतृत्व न केवल सक्रिय है, बल्कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर भी खरा उतरता दिख रहा है। ऐसे समय में जब प्रशासनिक निर्णयों को अक्सर राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, मंडावी का दृष्टिकोण संतुलित और जनहित केंद्रित प्रतीत होता है।किसी भी जिले का विकास केवल योजनाओं के कागजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी असली तस्वीर जमीनी क्रियान्वयन में नजर आती है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे नवगठित जिले में व्यवस्थाओं को पटरी पर लाना अपने आप में एक चुनौती है। सीमित संसाधन, प्रशासनिक ढांचे का विस्तार और स्थानीय अपेक्षाओं का दबाव—इन सबके बीच यदि कोई अधिकारी संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है, तो उसे समर्थन मिलना स्वाभाविक है।लीना कमलेश मंडावी ने अपने कार्यकाल में यह स्पष्ट किया है कि शासन का उद्देश्य केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। चाहे राजस्व प्रकरणों का निराकरण हो, जनदर्शन में आम लोगों की समस्याओं का समाधान हो, या फिर विकास कार्यों की निगरानी—हर स्तर पर उनकी सक्रियता नजर आती है। यह सक्रियता ही प्रशासन में विश्वास का आधार बनती है।आलोचनाएं किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन जब आलोचना तथ्यों से अधिक धारणाओं पर आधारित हो, तो वह व्यवस्था को कमजोर करने का काम करती है। मंडावी के संदर्भ में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां बिना ठोस प्रमाण के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कार्यों की वास्तविकता को समझा जाए।यह भी ध्यान रखना होगा कि एक कलेक्टर का दायित्व केवल फाइलों तक सीमित नहीं होता। उसे सामाजिक संतुलन, कानून-व्यवस्था और विकास के बीच समन्वय स्थापित करना होता है। मंडावी ने इन सभी क्षेत्रों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है। यही कारण है कि जिले के विभिन्न वर्गों में उनके प्रति भरोसा बना हुआ है।आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन को अनावश्यक विवादों में उलझाने के बजाय उसके सकारात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाए। यदि कहीं कमी है तो उसे रचनात्मक सुझावों के माध्यम से दूर किया जाए, न कि निराधार आरोपों के जरिए माहौल को दूषित किया जाए।अंततः, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे उभरते जिले को एक मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। लीना कमलेश मंडावी का अब तक का कार्यकाल इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत देता है। यह समय आलोचना के साथ-साथ समर्थन का भी है, ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे और प्रशासन पर जनता का विश्वास और मजबूत हो।