तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर संभाग अंर्तगत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन क्रेडिट योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभागीय विभागीय सूत्रों के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन में अधिकारी, कर्मचारी और सप्लायर की मिलीभगत से संगठित तरीके से घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि योजना की शुरुआत से ही भ्रष्टाचार का खेल शुरू हो गया था और बजट खपत के दबाव में तत्कालीन डीएफओ द्वारा प्लांटेशन के लिए ऐसे स्थलों का चयन किया गया जो लगभग 90 प्रतिशत तक अनुपयुक्त थे।स्वीकृति मिलते ही आनन-फानन में कार्य शुरू किया गया और जहां मजदूरों से गड्ढा खुदवाना था, वहां जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर से खुदाई कराई गई। शिकायत होने पर प्रारंभिक भुगतान रोका गया, लेकिन कुछ समय बाद फर्जी मजदूरों के नाम पर वनकर्मियों के करीबी लोगों के खातों में राशि डालकर उसका बंदरबांट कर लिया गया। इसके साथ ही पौध तैयार करने के नाम पर भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने का आरोप है। बताया गया कि 500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 300 टाल प्लांट तैयार किए जाने थे, जिसके लिए उपजाऊ मिट्टी, खाद, दवाइयां, रेत और बीज की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से अपने करीबी फर्मों से दर्शाई गई, जबकि हकीकत में केवल बिल बनाकर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च दिखा दिए गए और पौध तैयार ही नहीं किए गए।विभागीय सूत्रों का यह भी कहना है कि टाल प्लांट तैयार नहीं होने के कारण पहले से नर्सरी में उपलब्ध 2 फीट के स्थानीय पौधों को ही रोपित कर दिया गया, जबकि कागजों में टाल प्लांट तैयार कर रोपण दर्शाया गया और करोड़ों की राशि का गबन कर लिया गया। वहीं सामग्री खरीदी में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है, जहां जेम पोर्टल के जरिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर चहेती फर्मों को काम दिया गया और या तो घटिया सामग्री सप्लाई की गई या फिर सप्लाई किए बिना ही करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।विभागीय सूत्रों ने बताया कि इस पूरे मामले में उपवनमंडल अधिकारी, मुख्य लिपिक, जेम टेंडर प्रभारी, ग्रीन क्रेडिट शाखा प्रभारी, डीएफओ कार्यालय मरवाही, विभिन्न परिक्षेत्र अधिकारियों, नर्सरी प्रभारियों तथा रोपण से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। निश्चित रूप से इसकी निष्पक्ष जांच सीबीआई या आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से कराने की मांग की है, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके और योजना में हुए कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ