अंतिम विदाई में मानवता की मिसाल: अखिल सिंधवानी ने जाते-जाते दो चेहरों पर बिखेरी रोशनी।

Share Now

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर शहर में समाज में जब कोई असमय विदा होता है, तो पीछे केवल शोक रह जाता है, लेकिन सिंधी कॉलोनी निवासी स्व. अखिल सिंधवानी ने अपनी विदाई को अमर बना दिया। मात्र 30 वर्ष की अल्पायु में रविवार को स्वर्गवास होने के बाद, अखिल अपने पीछे दो लोगों के जीवन में ‘नेत्रज्योति’ का अनमोल उपहार छोड़ गए हैं।दुख की इस कठिन घड़ी में अखिल के पिता अजय सिंधवानी एवं उनके परिजनों ने एक अत्यंत साहसी और मानवतावादी निर्णय लिया। उन्होंने अखिल की स्मृतियों को जीवित रखने के लिए नेत्रदान करने का संकल्प किया और इसके लिए ‘हैंड्स ग्रुप’ से संपर्क किया।सूचना मिलते ही हैंड्स ग्रुप के पंकज असरानी व अन्य सदस्य सक्रिय हुए। सिम्स अस्पताल के डॉ. संजय चौधरी, डॉ. आरती सिंह एवं डॉ. रुचि वर्मा की मेडिकल टीम तत्काल सिंधवानी परिवार के निवास स्थान पहुँची और ससम्मान नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न की। अखिल के इन अंगों से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों की दुनिया रोशन हो सकेगी।हैंड्स ग्रुप के सदस्यों ने इस नेक कार्य पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी कई मासूम बच्चे और बुजुर्ग अंधकारमय जीवन जीने को मजबूर हैं और किसी की ‘एक पहल’ का इंतज़ार कर रहे हैं। नेत्रदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सबसे बड़ा दान है। एक व्यक्ति का यह संकल्प दो लोगों के जीवन से अंधेरा मिटाकर उनमें नई उम्मीद की जोत जला सकता है।अखिल सिंधवानी का यह बलिदान समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो हमें सिखाता है कि मृत्यु के बाद भी हम किसी की आँखों के जरिए इस दुनिया को देख सकते हैं।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!