गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, नूर मोहम्मद, ब्यूरो प्रमुख सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के गृह जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर मरवाही वन मंडल कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की खुलेआम अनदेखी सामने आई है।मिली जानकारी के अनुसार, वन मंडल मरवाही में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद आवेदकों को समयसीमा में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। यह स्थिति न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना पर भी सीधा आघात है।और भी चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित कार्यालय में RTI से संबंधित कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जो कि अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रावधानों में शामिल है। इससे स्पष्ट होता है कि विभाग न केवल नियमों की अनदेखी कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों को उनके अधिकारों से भी वंचित कर रहा है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर जानकारी देने से बच रहे हैं, जिससे कई मामलों में अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके। यदि यही स्थिति बनी रही, तो प्रशासन की विश्वसनीयता पर और गहरे सवाल उठना तय है।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर “कागजों में कानून” की यह कहानी यूं ही जारी रहेगी।