विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु…महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का छठवां दीक्षांत समारोह।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

वर्धा वह जिला है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। गांधीजी ने उस समय जो विकसित भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने में विद्यार्थियों का बड़ा योगदान अपेक्षित है। इसलिए विद्यार्थियों को व्यक्तिगत प्रगति के साथ-साथ देश को सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लिए भी योगदान देना चाहिए, ऐसा आह्वान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया।वह वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं। इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे, राज्यमंत्री तथा जिले के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर तथा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा उपस्थित थीं।राष्ट्रपति मुर्मु ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए पदक विजेताओं की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत प्रगति तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए करें। महात्मा गांधी के आत्मनिर्भरता के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नवाचार, मूल्य आधारित शिक्षा और सामाजिक प्रतिबद्धता के आधार पर ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है।उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का सम्मान और संरक्षण करना समय की आवश्यकता है। अन्य भाषाओं का विरोध किए बिना मातृभाषा का सम्मान बनाए रखना चाहिए। दुनिया की कोई भी भाषा सीखें, लेकिन अपनी भाषा को प्राथमिकता दें। सेवाग्राम आश्रम की यात्रा के दौरान उन्हें महात्मा गांधी के सादगीपूर्ण जीवन, राष्ट्रप्रेम और समाजसेवा से प्रेरणा मिली।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, जिससे अंतरभाषीय संवाद को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंदी एक समृद्ध भाषा है और इसके साथ सभी भारतीय भाषाओं पर गर्व करना चाहिए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इंग्लैंड में शिक्षा प्राप्त की और दक्षिण अफ्रीका में सामाजिक आंदोलन खड़ा किया, लेकिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास किए।दीक्षांत समारोह में छात्राओं को अधिक पदक प्राप्त हुए, जिसकी राष्ट्रपति ने सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और अब विकसित भारत के निर्माण में भी युवाओं के साथ युवतियों को समान रूप से योगदान देना चाहिए।राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को सदाचार, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। डिजिटल युग में हिंदी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यह केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा की अभिव्यक्ति का माध्यम है।राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में रोजगारोन्मुख बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की परिकल्पना के अनुरूप नई शिक्षा नीति लचीली, कौशल आधारित और विद्यार्थी केंद्रित है।इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों विभिन्न संकायों के आठ विद्यार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से स्वर्ण पदक, कुलाधिपति पदक एवं सर्वोदया रत्नमाला तु. बोरकर स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने माननीय राष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष द्रौपदी मुर्मु एवं राज्यपाल माननीय जिष्णु देव वर्मा का स्वागत किया। उन्होंने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दीक्षांत उपदेश दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों, शोध गतिविधियों और छात्र विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओमप्रकाश भारती ने किया। कार्यक्रम में कार्य परिषद के सदस्य, विद्या परिषद के सदस्य, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों सहित विधायक दादाराव केचे, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील, पूर्व सांसद रामदास तडस, जिलाधिकारी वान्मथी सी., मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमण, जिला पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और अधिकारी उपस्थित थे।


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