तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले में इन दिनों बिजली व्यवस्था को लेकर आम जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है। एक ओर जहां आम उपभोक्ताओं से लगातार बढ़े हुए बिजली बिल वसूले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों को कथित तौर पर सस्ती या मुफ्त बिजली उपलब्ध कराए जाने के आरोप तेज होते जा रहे हैं। इस दोहरे मापदंड ने आम नागरिकों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है।शहर और ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। रोजाना घंटों बिजली गुल रहने से न केवल घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और विद्यार्थियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में हालात और भी गंभीर हो गए हैं, जहां लोगों को रातभर जागकर समय काटना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग एक तरफ तो समय पर बिल जमा न करने पर कड़ी कार्रवाई करता है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को विशेष छूट दी जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनसे महंगे दरों पर बिजली वसूली जा रही है, लेकिन बदले में उन्हें नियमित और पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है। कई गांवों में दिनभर में कई बार बिजली कटौती हो रही है, जिससे किसानों की सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि फसल के इस महत्वपूर्ण समय में बिजली की अनियमितता से उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी कारणों और बढ़ती मांग के चलते कुछ समय के लिए कटौती की जा रही है, लेकिन विभाग स्थिति को सुधारने के प्रयास कर रहा है। हालांकि, लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है और हर साल गर्मी के मौसम में यही हाल रहता है।जनता ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली वितरण में पारदर्शिता लाई जाए और आम उपभोक्ताओं के साथ भेदभाव बंद किया जाए। साथ ही, नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।