देश के करोड़ों संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए PMO को पत्र; 25 लाख के बीमा और सख्त पारदर्शिता की मांग।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

भारत के विकास की रीढ़ माने जाने वाले करोड़ों संविदा (Contract) और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के भविष्य को लेकर एक बड़ी मुहिम शुरू हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रवेश कुमार जोशी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में एक आधिकारिक शिकायत/सुझाव (रजिस्ट्रेशन नंबर: PMOPG/E/2026/0065346) दर्ज कराकर केंद्र सरकार का ध्यान श्रमिक वर्ग की दयनीय स्थिति की ओर खींचा है।कानूनी इरादे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है , प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जोशी ने कहा है कि सरकार द्वारा लाए गए *’चार नए श्रम कोड’ (Labour Codes)* निस्संदेह एक आधुनिक कदम हैं, लेकिन इनका लाभ अभी भी अंतिम पायदान पर खड़े श्रमिक तक नहीं पहुँच पा रहा है। पत्र में मुख्य रूप से चार गंभीर समस्याओं को रेखांकित किया गया है, पहला वेतन विसंगति, स्किल्ड वर्कर को अनस्किल्ड बताकर कम वेतन देना। सरकारी न्यूमतम दर से भी कम दर में वेतन देना। दूसरा श्रम शोषण, 8 घंटे से अधिक काम और ओवरटाइम का भुगतान न होना। तीसरा सामाजिक सुरक्षा का अभाव, PF और ग्रेच्युटी जमा करने में कंपनियों की कोताही। चौथा सुरक्षा का संकट, जोखिम भरे कार्यों में लगे श्रमिकों के पास जीवन बीमा की कमी।जोशी के ‘तीन बड़े सुझाव यह है की, प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए, शिकायतकर्ता ने तीन प्रमुख समाधान प्रस्तावित किए हैं, जो श्रम जगत की तस्वीर बदल सकते हैं, पहला ,स्थानीय भाषा में सूचना का अधिकार, सभी कंपनियों, निर्माण स्थलों और सरकारी दफ्तरों के बाहर नए लेबर कोड और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी *स्थानीय भाषा* में बड़े साइनबोर्ड पर लगाना अनिवार्य हो। दूसरा , व्हाट्सएप (WhatsApp) आधारित शिकायत निवारण, हेल्पलाइन नंबरों के साथ-साथ एक समर्पित व्हाट्सएप लाइन शुरू की जाए, जहां श्रमिक आसानी से अपनी समस्या दर्ज कर सकें और एक निश्चित समय सीमा के भीतर उसका समाधान हो। तीसरा , ₹25 लाख का अनिवार्य बीमा, कार्यस्थल पर दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में पीड़ित परिवार को बेसहारा होने से बचाने के लिए कंपनी की ओर से कम से कम *25 लाख रुपये का एक्सीडेंटल या टर्म इंश्योरेंस* अनिवार्य किया जाए। हमारे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के अधिकारों को मज़बूत करने से न सिर्फ़ हमारी लगभग आधी आबादी मज़बूत होगी, बल्कि सुशासन (Good Governance) के क्षेत्र में भारत एक वैश्विक मिसाल बनेगा।PMO की प्रतिक्रिया पर टिकी है नजरें, जब शिकायत 18 अप्रैल 2026 को प्राप्त कर ली गई है और वर्तमान में यह *Prime Minister’s Office* के विचाराधीन है। यदि सरकार इन सुझावों को मान लेती है, तो यह देश के औद्योगिक ढांचे में एक बड़े सुधार का मार्ग प्रशस्त करेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गुड गवर्नेंस’ और ‘पारदर्शिता’ के इस युग में श्रमिकों को उनके हक के प्रति जागरूक करना ही सरकार की सबसे बड़ी सफलता होगी। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस दिशा में संबंधित मंत्रालयों को क्या निर्देश जारी करता है।


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