कैंसर के विरुद्ध जंग में गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका पर हुई अहम बैठक…कैंसर की रोकथाम का बनाया रोड मैप।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

कैंसर रजिस्ट्री के कार्य को सुगम तथा जन-जन तक पहुँचाने में गैर-सरकारी संस्थायें अहम् भूमिका निभा सकती हैं, कैंसर रजिस्ट्री वर्धा द्वारा वर्धा नगर परिषद कार्यालय में आयोजित गैर सरकारी संस्थाओं की बैठक में उपस्थित सभी संस्थाओं के प्रतिनिधि इस बात पर पूर्ण सहमत हुए.कैंसर रजिस्ट्री की गतिविधियों तथा कैंसर को हराने की मुहीम में गैर सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा हेतु वर्धा नगर परिषद के अध्यक्ष सुधीर पांगुल की अध्यक्षता में नगर परिषद परिसर में यह खास बैठक आयोजित की गई. बैठक में वर्धा जिले की 13 गैर सरकारी संस्थाओं के 34 प्रतिनिधि शामिल हुए. आई सी एम आर-राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत वर्धा कैंसर रजिस्ट्री की मुख्य अन्वेषण अधिकारी डॉ. अनुपमा गुप्ता ने पिछले दस वर्षों में जिले के कैंसर सम्बन्धी आंकड़े पेश किये, तथा उन बिंदुओं को रेखांकित किया जिन पर तुरंत कार्यवाही की जरूरत है, ताकि जिले में कैंसर के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके. उन्होंने बताया कि इस समय मुख कैंसर के प्रतिवर्ष जुड़ने वाले नए रोगियों की दर 2015 की तुलना में दुगनी हो चुकी है, और अब यह अपेक्षाकृत युवा पुरुषों को भी ग्रस रहा है. उन्होंने मुख तथा स्तन कैंसर पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।इस दुतरफा संवाद बैठक में गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से कई प्रकार के उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई और सहयोग का भरोसा दिलाया गया जिसमें कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, कैंसर के रोगियों की पहचान, स्क्रीनिंग तथा उपचार में सहयोग, आर्थिक/ सामाजिक मदद, रोग-उपचार तथा पुनर्वास के कठिन समय में रोगी तथा उनके परिवारों से मनोसंवाद, कैंसर से जुड़े अंधविश्वास पर प्रहार करना आदि शामिल थे.उपस्थित प्रतिनिधियों ने जिल्हे के वातावरण में सेहत के लिए हानिकारक तत्वों की तेजी से बढ़ोत्तरी पर चिंता जताई और इन मामलों में सरकारी विभागों की लापरवाही और जनता में उदासीनता पर रोष व्यक्त किया।जैसे कि ग्रामीण भागों के संसाधन विहीन कैंसर रोगियों के लिए आर्थिक सहायता सरकारी-गैरसरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी और जागरूकता का अभाव, जिले में तम्बाकू तथा शराब पर प्रतिबन्ध और राष्ट्रीय तम्बाकू नशा नियंत्रण अभियान का बिलकुल बेअसर होना, ज्यादातर रेहड़ियों या रेस्तराओं में पकाये जा रहे खाद्य पदार्थों में जरूरत से ज्यादा गर्म किये तथा बार-बार उपयोग किये जाते तेल, सीसे की स्याही वाले अख़बार पर या पतली प्लास्टिक थैलियों/काले प्लास्टिक डिब्बों में खाद्य पदार्थ पैक करना, इन सब खतरनाक चलनों पर FDA फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस की लापरवाही।बैठक में कैंसर की गंभीर स्वास्थ्य समस्या से निपटने के अगले कदम के रूप में जिलाधीश तथा जिल्हे के अन्य सम्बंधित अधिकारियों से मिलने की योजना पर भी चर्चा की गई. जिससे न सिर्फ एक प्रभावकारी जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया जा सके बल्कि साथ ही कैंसर रोगियों की यथासंभव मदद की रूपरेखा तैयार हो सके।जिल्हे तथा राज्य में कैंसर को एक नोटिफायेबल डिजीज घोषित किये जाने सम्बन्धी सुझाव भी प्रस्तुत किया गया जिससे कैंसर का कोई रोगी नजरअंदाज न हो सके.बैठक को सफल बनाने में वर्धा कैंसर रजिस्ट्री से डॉ. स्वप्ना मलिये, सुदर्शन, सुश्री दीपाली तथा वर्धा के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं मुरलीधर बेलखोड़े, किशोर ठाकरे, सुमीत हिवसे, किशोर वाग्दरकर, मनोज अड़चुले, धनश्री भांडेकर, दुर्गा तिवारी, प्रतीक भरणे, संगीता बेले, तुषार रोड़े, पवन चिरसकर, डेनिएल यवलकर, अनिकेत राऊत, भाग्यश्री उगले, मञ्जूषा देशमुख, अमर देशमुख, कैप्टन मोहन गुजरकर, स्मिता व्यास, संगीता चावरे, किशोर उमाटे, गजानन पडोले आदि का विशेष योगदान रहा।


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