वन विभाग में कथित लेन-देन पर बवाल, नियुक्तियों की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में शीर्ष पदों को लेकर कथित आर्थिक लेन-देन की खबरों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े मामले में उच्च पद पर नियुक्ति के लिए करोड़ों रुपये की बोली और सौदेबाजी की चर्चाएं सामने आई हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।बताया जा रहा है कि इस कथित सौदे में शुरुआती स्तर पर कुछ करोड़ रुपये पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में रकम के बंटवारे को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। आरोप हैं कि तय हिस्सेदारी का भुगतान नहीं होने से मामला अटक गया, जिसके चलते जुड़े पक्षों के बीच नाराजगी बढ़ गई। अब 26 अप्रैल तक नई बोली या किसी नए समझौते की संभावना जताई जा रही है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।विभागीय सूत्रों का दावा है कि यह मामला उच्च स्तर तक पहुंच चुका है और संबंधित अधिकारियों के बीच इस पर चर्चा भी हुई है। हालांकि, अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसी बीच विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल वन विभाग बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।मामला यहीं तक सीमित नहीं है। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि राजधानी के एक आवासीय क्षेत्र में रहने वाले एक संगठन से जुड़े व्यक्ति पर भी पदस्थापना को प्रभावित करने और आर्थिक लेन-देन के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि निर्धारित प्रतिशत की मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ विवाद की स्थिति बनी थी, जिससे इस पूरे नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।इसके साथ ही, यह आरोप भी सामने आया है कि निजी संपर्कों और अप्रत्यक्ष माध्यमों के जरिए एक व्यक्ति की किसी जिले में महत्वपूर्ण पुलिस पद पर नियुक्ति कराई गई। इस तरह के दावों ने प्रशासनिक निष्पक्षता और नियुक्ति प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।फिलहाल, संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और न ही आरोपों की पुष्टि हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है। माना जा रहा है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं।नोट: यह समाचार उपलब्ध सूचनाओं और सूत्रों के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


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