तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
राजधानी रायपुर में निजी स्कूलों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और आरटीई (Right to Education) के तहत छात्रों के अधिकारों के मुद्दे पर एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। राज्य सूचना आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर ₹3 लाख 75 हजार का अर्थदंड अधिरोपित करते हुए 10 अलग-अलग प्रकरणों में विस्तृत दस्तावेज़ उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन प्रकरणों में राजधानी के लगभग 900 निजी स्कूलों से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज़ शामिल हैं। इनमें आरटीई के तहत विद्यार्थियों के अधिकारों के उल्लंघन, फीस नियामक वर्ष 2020 से संबंधित रिकॉर्ड तथा विभिन्न स्तरों पर हुए कथित अनियमितताओं के दस्तावेज़ शामिल बताए जा रहे हैं।इस पूरे मामले में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने पिछले दो वर्षों से लगातार राज्य सूचना आयोग में पैरवी की। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें कई बार पेशियों में शामिल होना पड़ा और महंगे वकीलों के साथ कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। उनका दावा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के “चक्रव्यूह” को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।हालांकि, सूचना आयोग के दो निर्णयों से असंतोष जताते हुए तिवारी ने कहा है कि वे इस मामले को अब उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। विशेष रूप से कृष्णा पब्लिक स्कूल को मिली राहत के खिलाफ वे अपील दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।विकास तिवारी ने खुद को एक सामान्य नागरिक बताते हुए कहा कि वे न तो किसी राजनीतिक पद पर हैं और न ही जनप्रतिनिधि, लेकिन रायपुर के लाखों अभिभावकों और बच्चों के अधिकारों की लड़ाई वे पूरी ताकत से लड़ते रहेंगे। उन्होंने निजी स्कूलों पर “माफिया तंत्र” का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक बच्चों को उनका हक नहीं मिल जाता।इस फैसले के बाद रायपुर के शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।