तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ विधायक धरम लाल कौशिक के मोबाइल लूट मामले में जिस तरह पूरा पुलिस महकमा हरकत में आया, उसने एक बार फिर कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान भारत माता चौक, शंकर नगर के पास बाइक सवार बदमाश मोबाइल झपटकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही राजधानी पुलिस का पूरा सिस्टम सक्रिय हो गया। 2 डीसीपी, 2 एडीसीपी, 3 एसीपी, 3 थाना प्रभारी और क्राइम ब्रांच के लगभग 30 जवान जांच में झोंक दिए गए। शहरभर के 150 से अधिक आईटीएमएस कैमरों की फुटेज खंगाली गई और महज 10 घंटे के भीतर गुढ़ियारी के चूना भट्टी इलाके से आरोपी मणिचंद्र ध्रुव को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है, लेकिन इसके साथ ही आम जनता के मन में एक तीखा सवाल भी उठ रहा है — क्या यही तत्परता आम नागरिकों के मामलों में भी दिखाई जाती है?
राजधानी सहित प्रदेशभर में रोजाना मोबाइल लूट, चैन स्नेचिंग, चोरी, डकैती और मारपीट जैसी घटनाएं सामने आती हैं। कई मामलों में पीड़ित थाने के चक्कर काटते रह जाते हैं, एफआईआर दर्ज होने में देरी होती है और जांच महीनों तक फाइलों में दबकर रह जाती है। कई पीड़ितों को तो यह तक सुनना पड़ता है कि “मोबाइल गया है, मिलना मुश्किल है।”लेकिन जैसे ही मामला किसी बड़े नेता या प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ता है, पूरा सिस्टम अलर्ट मोड में आ जाता है। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कानून का असर और पुलिस की सक्रियता व्यक्ति की हैसियत देखकर तय होती है?इस घटना को लेकर राजनीति भी गर्मा गई। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधते हुए तंज कसा कि “आप डायल 112 को हरी झंडी दिखाते रहिए, उधर धरमलाल कौशिक का मोबाइल छिनकर चोर 9-2-11 हो गए।
”हालांकि पुलिस की तेज कार्रवाई सराहनीय मानी जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न अब भी कायम है — क्या यही संवेदनशीलता और तत्परता आम जनता के साथ होने वाली घटनाओं में भी दिखाई जाएगी?
क्योंकि जनता अब यह महसूस करने लगी है कि प्रदेश में अपराध का दर्द सबके लिए समान नहीं, बल्कि पहचान और पहुंच देखकर उसकी गंभीरता तय होती है।