सुशासन तिहार में सांसद-विधायकों की पेंशन बंद करने की उठी मांग“जनप्रतिनिधियों को नहीं, जनता के हितों को मिले प्राथमिकता”।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी

सुशासन तिहार 2026 के दौरान महासमुंद नगर पालिका क्षेत्र के डॉ. राधाकृष्णन वार्ड निवासी पंकज साहू ने एक अनोखा एवं चर्चित आवेदन प्रस्तुत कर सांसदों और विधायकों को दी जा रही पेंशन व्यवस्था को बंद करने की मांग उठाई है। उनके द्वारा दिया गया आवेदन अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2008 में पूर्व विधायकों को पेंशन देने की योजना प्रारंभ की गई थी। प्रारंभिक तौर पर यह राशि 15 हजार रुपए निर्धारित की गई थी, जो समय के साथ लगातार बढ़ते हुए वर्तमान में लगभग 98 हजार रुपए तक पहुंच गई है। आवेदक ने इसे शासन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों को पहले से ही कई प्रकार की सुविधाएं एवं मानदेय प्राप्त होते हैं, ऐसे में आजीवन पेंशन व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।पंकज साहू ने आवेदन में यह भी कहा कि सांसद और विधायक जनता की सेवा के लिए चुने जाते हैं, इसलिए पेंशन जैसी सुविधाओं के बजाय सरकारी धन का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार एवं गरीब कल्याण जैसी योजनाओं में किया जाना अधिक जनहितकारी होगा। उन्होंने मांग की कि इस विषय पर राज्य एवं केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लें।सुशासन तिहार के अंतर्गत प्राप्त इस आवेदन ने आम लोगों के बीच भी नई बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग जनप्रतिनिधियों की संवैधानिक सुविधाओं के पक्ष में भी अपनी राय रख रहे हैं।

गौरतलब है कि सुशासन तिहार के माध्यम से आम नागरिकों को शासन-प्रशासन तक अपनी समस्याएं, सुझाव और मांगें सीधे पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। इसी कड़ी में यह आवेदन भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसहभागिता का एक उदाहरण बनकर सामने आया है।


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