संपादक के कलम से…तबादला नीति के नाव मं भेदभाव?- कागज मं नियम, जमीन मं रसूख के राज।

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तरुण कौशिक संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ शासन के तबादला नीति एक बार फेर सवाल के घेरे मं आ गे हे। सरकार हर बड़े-बड़े दावा करत हे कि एकेच जगह मं तीन बछर ले जियादा जमे अधिकारी-कर्मचारी मन ल हटाय जाही, फेर जमीनी हकीकत देखे जावय त स्थिति एकदम उल्टा नजर आथे। कई विभाग मन मं अइसने अफसर अउ बाबू मन आज घलो अंगद के पांव कस एकेच जिला अउ एकेच कुर्सी मं दस-दस बछर ले जमे बैठे हें।सरकार के नीति मं साफ लिखाय गे हे कि लंबे समय ले एकेच जगह मं पदस्थ कर्मचारी मन के तबादला करके प्रशासनिक पारदर्शिता बनाय रखे जाही, फेर सवाल ये उठत हे कि आखिर ये नियम सिरिफ कमजोर अउ सामान्य कर्मचारी मन बरच काबर लागू होवत हे? रसूखदार अउ राजनीतिक पहुंच वाले कर्मचारी मन ऊपर ये नियम के असर काबर नई दिखत?आज स्थिति ए होगे हे कि विभाग मन मं कुछ कर्मचारी अइसने हें जेन मन के पहुंच ऊपर तक हे, तऊन मन बर तबादला नीति सिरिफ कागज के चीज बनके रहि गे हे। संवेदनशील शाखा मन मं सालों-साल ले जमे कर्मचारी मन ऊपर विभाग कार्रवाई करे के हिम्मत तक नई जुटा पावत। एखर सीधा असर प्रशासनिक निष्पक्षता अउ भ्रष्टाचार ऊपर पड़त हे। जिहां एकेच आदमी बरसों तक जमे रहिथे, उहां सांठगांठ, प्रभाव अउ लेन-देन के संभावना खुद-ब-खुद बढ़ जाथे।दूसर कोती शासन हर पति-पत्नी ल एकेच जिला मं पदस्थ करे के बात कहिथे, फेर हकीकत मं हजारों कर्मचारी अपन परिवार ले दूर नौकरी करे बर मजबूर हें। कई महिला कर्मचारी मन बर छोटे-छोटे लइका मन के पढ़ई, घर-परिवार अउ नौकरी के बीच संतुलन बनाना भारी पड़त हे। बरसों ले आवेदन देय के बाद घलो सुनवाई नई होवत। आखिर सवाल ये हे कि जब नीति मं प्रावधान हे, त ओकर पालन काबर नई होवत?स्थिति तब अउ गंभीर हो जाथे जब प्रदेश मं सामान्य तबादला ऊपर रोक लगे रहिथे, फेर “विशेष अनुमति” के नाम मं चुनिंदा लोगन के आदेश लगातार निकलत रहिथे। विभागीय गलियारा मं ये चर्चा जोरों मं हे कि जेन मन के राजनीतिक पहुंच मजबूत हे या जेन मन कथित रूप ले मोटा खर्चा करे मं सक्षम हें, ओमन के फाइल तेजी ले आगे बढ़ जाथे। बाकी सामान्य कर्मचारी मन सिरिफ आवेदन अउ कार्यालय के चक्कर काटत रहि जाथें।भलेच ये आरोप मन के आधिकारिक पुष्टि नई होय हे, फेर कर्मचारी मन के बढ़त नाराजगी सरकार के तबादला प्रक्रिया ऊपर गंभीर सवाल खड़ा करत हे। यदि सरकार सच मं पारदर्शिता चाहत हे, त ओकर नीति सब्बो ऊपर एक समान लागू होना चाही। सिरिफ प्रभावशाली मन ल राहत अउ सामान्य कर्मचारी मन के उपेक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था ऊपर भरोसा कमजोर करथे।आज जरूरत ए बात के हे कि सरकार तबादला नीति ल कड़ाई अउ निष्पक्षता ले लागू करे। जेन कर्मचारी बरसों ले एकेच जगह जमे हें, ओमन ऊपर समान कार्रवाई होवय अउ जेन परिवार पति-पत्नी अलग-अलग जिला मं रहिके मानसिक अउ आर्थिक परेशानी झेलत हें, ओमन ल प्राथमिकता के आधार मं राहत मिलय।नइ त जनता अउ कर्मचारी मन के मन मं ये सवाल हमेशा जिंदा रहिही — का छत्तीसगढ़ के तबादला नीति सच मं प्रशासन सुधार बर बनाय गे हे, या फेर सिरिफ आदेश अउ कागज तक सीमित एक दिखावा भर आय?


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