तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा 2007 बैच की वरिष्ठ अधिकारी शम्मी आबिदी को राजस्व विभाग की सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह वही विभाग है, जो आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ माना जाता है और जहां जमीन, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, नक्शा सुधार, ऋण पुस्तिका, डायवर्सन जैसे कार्यों के लिए लोगों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।राज्य में लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि राजस्व विभाग में बिना लेन-देन कोई भी कार्य आसानी से नहीं होता। तहसील कार्यालयों से लेकर पटवारी हल्कों तक रिश्वतखोरी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। कई बार राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख पाया।ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर शिकायतें सुनने को मिलती हैं कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी आम लोगों से पैसे मांगे जाते हैं। जमीन संबंधी विवादों और प्रक्रियाओं को जानबूझकर लंबा खींचने के आरोप भी समय-समय पर लगते रहे हैं। यही कारण है कि राजस्व विभाग की छवि आम जनता के बीच सबसे विवादित विभागों में गिनी जाती है।ऐसे समय में शम्मी आबिदी को विभाग की कमान मिलना प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई सचिव विभाग में वर्षों से जमी भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर प्रभावी अंकुश लगा पाएंगी, या फिर यह व्यवस्था पहले की तरह ही चलती रहेगी।लोगों का मानना है कि यदि राजस्व विभाग में पारदर्शिता लानी है तो केवल स्थानांतरण और निलंबन से काम नहीं चलेगा। ऑनलाइन प्रक्रिया को मजबूत करना, समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे कदम जरूरी होंगे।राजस्व विभाग सीधे किसानों, ग्रामीणों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा है। इसलिए इस विभाग में सुधार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को पुनः स्थापित करने का विषय भी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सचिव शम्मी आबिदी इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और क्या वास्तव में राजस्व विभाग की कार्यशैली में बदलाव दिखाई देगा।